महानदी जल विवाद: नवीन पटनायक ने BJP की मंशा पर उठाये सवाल
भुवनेश्वर । डेस्क: नवीन पटनायक ने सवाल उठाया है कि क्या ओडिशा और छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकारों के बीच महानदी जल विवाद पर कोई गुप्त समझौता हुआ है.
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी द्वारा महानदी जल विवाद को छत्तीसगढ़ सरकार के साथ बातचीत के जरिये सुलझाने की बात दोहराये जाने के एक दिन बाद, विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने गुरुवार को इस मुद्दे पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की.
बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच "पारस्परिक समझौते" के जरिये विवाद सुलझाने के राज्य सरकार के फैसले ने कई गंभीर सवाल खड़े किये हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
उन्होंने मांग की कि राज्य सरकार तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाये और यह स्पष्ट करे कि छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकार के साथ किस तरह का समझौता विचाराधीन है या पहले ही तय किया जा चुका है.
नवीन ने सवाल उठाया, "क्या ओडिशा की बीजेपी सरकार छत्तीसगढ़ की बीजेपी सरकार के साथ गुप्त रूप से कोई ऐसा समझौता कर रही है, जो ओडिशा के जल अधिकारों को कमजोर कर सकता है? ओडिशा की जनता को इस मुद्दे पर जवाब चाहिये."
उन्होंने यह भी पूछा कि क्या राज्य सरकार महानदी जल विवाद ट्रिब्यूनल के समक्ष मामले को मजबूती से आगे बढ़ा रही है या कानूनी लड़ाई को छोड़ने की तैयारी कर रही है. नवीन ने कहा, "यह चिंता बढ़ रही है कि इतनी मेहनत से लड़ी जा रही कानूनी लड़ाई को चुपके से कमजोर किया जा रहा है."
नवीन ने सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाये, क्योंकि ट्रिब्यूनल की सुनवाई में अब केवल आठ दिन बाकी हैं, जो 2 अगस्त को होनी है.
उन्होंने कहा, "सरकार इस मुद्दे पर चुप क्यों है? हितधारकों, राजनीतिक दलों और जनता को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया? क्या महानदी जल पर ओडिशा के जायज हक को बंद कमरों में कमजोर किया जा रहा है?"
नवीन ने इस मुद्दे पर पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की.
क्या है महानदी जल विवाद
ओडिशा का आरोप है कि पिछले 50 सालों में महानदी पर छत्तीसगढ़ में एक के बाद एक बांध बनते गये. इसके अलावा बिजली और उद्योगों के लिये महानदी के पानी का उपयोग होने से ओडिशा में नदी का प्रवाह कम हो गया है. इसके कारण खेती तो प्रभावित हो ही रही है, पेयजल का भी संकट पैदा होने लगा है. इस मुद्दे पर ओडिशा में पिछले कई सालों से जन आंदोलन चल रहे हैं. महानदी के जल संकट को सुलझाने के मुद्दे पर नागरिक संगठन पिछले कुछ सालों से सैकड़ों अध्ययन, ज्ञापन, धरना, प्रदर्शन कर चुके हैं लेकिन अब तक कोई रास्ता नहीं निकल पाया है.
छोटी बांध परियोजनाओं तक तो बात बयानों तक रही लेकिन छत्तीसगढ़ ने चार बड़ी परियोजनाओं पर जब काम शुरु किया तो ओडिशा में विरोध के स्वर उभरे. इसमें केलो डैम, टेरी महानदी, तांदुला रिज़रवॉयर और तांदुला बांध शामिल था।.साल 2009 में केलो डैम के अलावा किसी भी परियोजना को केंद्रीय जल आयोग से मंजूरी नहीं दी गई. लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने इस मंजूरी के बिना ही तांदुला बांध के निर्माण की गतिविधियां शुरु कर दीं.
ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने छत्तीसगढ़ में बनने वाले बांध और बैराज पर रोक लगाने के लिए प्रधानमंत्री को कई अवसरों पर चिट्ठियां लिखीं. इसके उलट छत्तीसगढ़ सरकार दावा करती रही कि इन तमाम बैराज और बांधों का निर्माण केवल छत्तीसगढ़ में पानी की जरुरतों को पूरा करने के लिए किया जा रहा है, इससे ओडिशा को कोई नुकसान नहीं होगा. छत्तीसगढ़ ने 10 सालों के पानी के प्रवाह का हवाला देते हुए दावा किया कि ओडिशा में पानी की कोई कमी नहीं है.