तेल कंपनियों के भारी मुनाफे के बावजूद LPG के दाम बढ़े
नई दिल्ली । डेस्क: देश में तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के रिकॉर्ड मुनाफे के बीच सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों में 29 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है. इस फैसले के बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है. पिछले तीन महीनों में यह दूसरी बढ़ोतरी है, जिससे आम जनता पर कुल 89 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है. इस फैसले को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जबकि सरकार ने इसे वैश्विक संकट और बढ़े हुए आयात खर्च का नतीजा बताया है.
विपक्ष का तीखा हमला:
कांग्रेस ने इस बढ़ोतरी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला है. कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोशल मीडिया पर तेल विपणन कंपनियों के मुनाफे के आंकड़े साझा करते हुए सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए. उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में तीन प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों ने 77,280.65 करोड़ रुपये का संचयी लाभ कमाया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 130 प्रतिशत अधिक है.
तिवारी ने पूछा कि जब कंपनियां इतना भारी मुनाफा कमा रही हैं, तो जनता पर बार-बार यह बोझ क्यों डाला जा रहा है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार आम जनता की जेब काटकर अपने अमीर दोस्तों की तिजोरियां भर रही है.
आम आदमी पार्टी ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि तीन महीने के भीतर दूसरी बार रसोई गैस के दाम बढ़ाकर सरकार ने महंगाई से त्रस्त जनता की कमर तोड़ दी है. 'आप' के अनुसार, 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर 942 रुपये का हो जाना आम परिवारों के बजट पर एक और बड़ा प्रहार है.
तृणमूल कांग्रेस ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि जब भी कोई वैश्विक संकट आता है, भाजपा सरकार उसका पूरा बोझ आम परिवारों पर डाल देती है. टीएमसी ने कहा कि खुद को 'विश्वगुरु' बताने वाली सरकार अपने नागरिकों को मूल्य वृद्धि के झटकों से बचाने में पूरी तरह विफल रही है. इसके अलावा, विपक्ष ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत मिलने वाली 300 रुपये की सब्सिडी को भी इस वैश्विक महंगाई के दौर में नाकाफी बताया है.
सरकार की सफाई और वैश्विक स्थिति:
विपक्ष के चौतरफा हमलों के बीच सरकार ने रविवार को एक बयान जारी कर इस बढ़ोतरी को अपरिहार्य बताया. सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलपीजी की कीमतों में भारी उछाल आया है. भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसकी कीमत सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) से तय होती है. फरवरी के बाद से इस बेंचमार्क में करीब 46 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जिसके कारण भारत में एक घरेलू सिलेंडर की आपूर्ति लागत बढ़कर 1,600 रुपये से अधिक हो गई है.
सरकार ने स्पष्ट किया कि इस मूल्य संशोधन से पहले भी सरकारी तेल कंपनियों को प्रति सिलेंडर लगभग 703 रुपये का नुकसान हो रहा था. हालांकि, सरकार ने यह भी दावा किया कि इस वैश्विक संकट के बावजूद भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल रहा, जिसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बिना किसी रुकावट के ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित की.
सरकार के मुताबिक, इस बढ़ोतरी के बाद भी भारत में रसोई गैस की कीमतें पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के साथ-साथ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम हैं.