केरल नन को मामले को रद्द करे- आर्कबिशप एंड्रयूज
तिरुवनंतपुरम । डेस्क: भारतीय कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस (CBCI) ने शनिवार को छत्तीसगढ़ में मानव तस्करी और जबरन धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार केरल की दो ननों को जमानत मिलने का स्वागत किया. विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी कोर्ट के फैसले पर राहत और समर्थन व्यक्त किया.
त्रिशूर के आर्कबिशप एंड्रयूज, जो CBCI के अध्यक्ष हैं, ने जमानत पर राहत जताई लेकिन आरोपों को "निराधार" बताते हुये मामले को पूरी तरह रद्द करने की मांग की. उन्होंने त्रिशूर में पत्रकारों से कहा, "सरकार को इस अन्याय को जल्द से जल्द खत्म करने के लिये जरूरी कदम उठाने चाहिये."
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक विशेष NIA कोर्ट ने दो ननों, प्रीति मेरी और वंदना फ्रांसिस, के साथ-साथ सुकमन मंडावी को सशर्त जमानत दी.
इन तीनों को 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार किया गया था, जब बजरंग दल के एक कार्यकर्ता ने आरोप लगाया था कि वे नारायणपुर की तीन लड़कियों का जबरन धर्मांतरण और तस्करी कर रही थीं.
फैसले की घोषणा होते ही, ननों के परिवार वालों ने दुर्ग जेल के बाहर जनप्रतिनिधियों के साथ गले मिलकर राहत व्यक्त की.
सिस्टर प्रीति और सिस्टर वंदना के भाई-बहनों ने भावुक क्षण साझा किये.
UDF, लेफ्ट फ्रंट और BJP के प्रतिनिधियों ने दुर्ग में फैसले सुनने के बाद खुशी जताई. जेल के बाहर मिठाइयां बांटी गईं.
विपक्ष के नेता वी. डी. सतीशन ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुये ननों के खिलाफ मामले को "झूठा और मनगढ़ंत" बताया.
तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का विरोध किया था लेकिन उनकी हिरासत में पूछताछ की मांग नहीं की.