केरल अत्यंत गरीबी मुक्त पहला राज्य बना: CM विजयन का दावा
तिरुवनंतपुरम । डेस्क: केरल के मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन ने 'केरल पिरवी' के अवसर पर विधानसभा की विशेष बैठक में राज्य को अत्यंत गरीबी से मुक्त घोषित कर दिया. यह भारत का पहला राज्य है, जिसने ऐसी घोषणा की है.
मुख्यमंत्री ने इसे केरल के लिए 'नए दौर का जन्म' करार दिया. विपक्षी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने बैठक का बहिष्कार कर दिया, इसे मुख्यमंत्री के बयान के लिए विशेष सत्र बुलाने को नियम 300 का दुरुपयोग बताते हुए 'खोखली घोषणा' कहा. विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशियन ने स्थानीय निकाय चुनावों से पहले प्रचार स्टंट का आरोप लगाया.
मुख्यमंत्री ने चार वर्षों की लंबी प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन किया. उन्होंने बताया कि वर्तमान लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट सरकार के पहले कैबिनेट बैठक में 2021 में अत्यंत गरीबी उन्मूलन परियोजना (ईपीईपी) शुरू करने का निर्णय लिया गया.
दो महीने के अंदर स्थानीय स्तर पर डेटा संग्रह शुरू हुआ, जिसमें स्थानीय निकाय प्रतिनिधि, कुदुंबश्री कार्यकर्ता, स्वयंसेवक और अधिकारी शामिल हुए. वॉर्ड समितियों द्वारा जांच के बाद सूची तैयार की गई, जो ग्राम सभाओं में प्रस्तुत हुई. अंततः 64,006 परिवारों के 1,03,099 सदस्यों को अत्यंत गरीब के रूप में चिह्नित किया गया. भोजन, स्वास्थ्य, आवास और आय को आधार मानकर प्रत्येक परिवार के लिए सूक्ष्म योजनाएं बनीं.
अत्यंत गरीबी उन्मूलन परियोजना के पहले चरण में 21,263 लोगों को राशन कार्ड और आधार कार्ड जैसे आवश्यक दस्तावेज प्रदान किए गए. कुदुंबश्री के माध्यम से 20,648 परिवारों को नियमित भोजन आपूर्ति सुनिश्चित की गई. स्वास्थ्य सेवाओं में दवाओं, टीकाकरण, पालीएटिव केयर और अंग प्रत्यारोपण की व्यवस्था हुई.
लाइफ मिशन के तहत 4,677 परिवारों को घर दिए गए, जबकि 2,713 परिवारों को भूमि और आवास उपलब्ध कराया गया. 4,394 परिवारों को आजीविका सहायता मिली.
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में 35,041 परिवार शामिल किए गए. शिक्षा विभाग ने 5,583 बच्चों पर विशेष ध्यान दिया, जिसमें मुफ्त यात्रा और 331 छात्रों को छात्रवृत्ति शामिल है. 428 एकल सदस्य परिवारों को सुरक्षित आश्रय गृहों में स्थानांतरित किया गया.
मुख्यमंत्री ने 1970 के दशक के संयुक्त राष्ट्र रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि तब केरल गरीबी और उच्च जन्म दर से जूझ रहा था. सामूहिक आंदोलनों, प्रगतिशील सरकारों और कृषि सुधारों से राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की. सार्वजनिक वितरण प्रणाली, भूमिहीनता और बेघरता उन्मूलन की निरंतरता में यह कदम उठा. संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास सूचकांक में केरल अग्रणी है.
उन्होंने कहा, 'हमारा राज्य कल्याण गतिविधियों का प्रयोगशाला है. यह उपलब्धि पूरे केरल की है.' सरकार ने योजना पर 1,000 करोड़ से अधिक खर्च किया. अब पूर्व लाभार्थियों के पुनः गरीबी में न गिरने की निगरानी के लिए नियमित जांच जरूरी है. यह उपलब्धि अन्य राज्यों के लिए मॉडल बनेगी.