शुक्र, 16 अक्टू. 2026

CGKhabar

कवासी लखमा को जमानत

C

CG Khabar

03 फ़र. 2026, 12:50 PM 4 मिनट में पढ़ें 1

कवासी लखमा
कवासी लखमा

रायपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है. सर्वोच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) से जुड़े मामलों में उन्हें अंतरिम जमानत प्रदान की है.


जमानत की शर्तों के तहत कवासी लखमा को छत्तीसगढ़ से बाहर रहना होगा. हालांकि, न्यायालय में पेशी के दौरान उन्हें राज्य में आने की अनुमति होगी. इसके साथ ही उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा तथा अपना वर्तमान पता और मोबाइल नंबर संबंधित पुलिस थाने में दर्ज कराना अनिवार्य होगा.


सुप्रीम कोर्ट में लखमा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने पक्ष रखा. उन्होंने बताया कि इस मामले में मंगलवार को करीब ढाई घंटे तक सुनवाई हुई.


गौरतलब है कि ED ने कवासी लखमा को 15 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के बाद उन्हें 7 दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई. इसके बाद 21 जनवरी से 4 फरवरी तक न्यायिक रिमांड पर भेजा गया. तब से वे रायपुर सेंट्रल जेल में बंद थे. उल्लेखनीय है कि करीब दो महीने पहले कांग्रेस ने जेल में बंद लखमा के इलाज में लापरवाही का आरोप भी लगाया था.


कवासी लखमा को अंतरिम जमानत मिलने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला एक बार फिर साबित करता है कि सत्य की राह कठिन जरूर होती है, लेकिन अंततः जीत सत्य की ही होती है.


सुप्रीम कोर्ट की फटकार


करीब तीन महीने पहले सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय को कड़ी फटकार लगाई थी. अदालत ने ED से सवाल किया था कि ऐसी कौन-सी जांच अब भी लंबित है, जिसे पूरा नहीं किया जा सका है, और उसे पूरा करने में कितना समय लगेगा.


सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एक ओर ED आरोपियों को जमानत न देने की बात करता है और दूसरी ओर यह दावा करता है कि जांच अभी जारी है. अदालत ने स्पष्ट किया कि यह बताया जाए कि कौन-सी जांच अब भी चल रही है.


इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ED को निर्देश दिया था कि जांच अधिकारी व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करें, जिसमें यह स्पष्ट किया जाए कि कवासी लखमा के खिलाफ कौन-सी जांच लंबित है और उसे पूरा करने में कितना समय लगेगा.


क्यों हुई कवासी लखमा की गिरफ्तारी


ED का आरोप है कि पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक कवासी लखमा शराब सिंडिकेट के एक अहम सदस्य थे और उनके निर्देशों पर ही यह सिंडिकेट काम करता था. एजेंसी का दावा है कि लखमा ने शराब नीति में बदलाव और FL-10 लाइसेंस की शुरुआत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.


ED के अनुसार, आबकारी विभाग में हो रही गड़बड़ियों की जानकारी होने के बावजूद लखमा ने उन्हें रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया. ED के वकील सौरभ पांडेय ने कोर्ट में दावा किया था कि शराब घोटाला करीब तीन साल तक चला, इस दौरान लखमा को हर महीने करीब 2 करोड़ रुपये मिले. इस तरह कुल 36 महीनों में उन्हें लगभग 72 करोड़ रुपये प्राप्त हुए. आरोप है कि इस राशि का इस्तेमाल उनके बेटे हरीश कवासी के घर और कांग्रेस भवन सुकमा के निर्माण में किया गया.


ED का यह भी कहना है कि इस घोटाले से छत्तीसगढ़ के सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ और शराब सिंडिकेट से जुड़े लोगों ने 2,100 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की. इसमें नेता, कारोबारी और अधिकारी शामिल थे.


क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला


छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय कर रही है. ED ने एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में FIR दर्ज कराई है, जिसमें 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का आरोप लगाया गया है. 


जांच में सामने आया है कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए इस घोटाले को अंजाम दिया गया.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP