JNU Violence: वीसी के इस्तीफे की मांग के बीच भिड़े छात्र गुट
नई दिल्ली । डेस्क: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) कैंपस एक बार फिर हिंसा और भारी हंगामे की चपेट में आ गया है. सोमवार तड़के वामपंथी और दक्षिणपंथी छात्र संगठनों के बीच हुई हिंसक झड़प में कई छात्रों के घायल होने की खबर है.
जानकारी के अनुसार, यह घटना सोमवार रात करीब 1:30 बजे की है, जब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) द्वारा आयोजित 'समता जुलूस' के दौरान स्थिति अनियंत्रित हो गई. जेएनयूएसयू ने यह मार्च कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित के इस्तीफे और हाल ही में दिए गए रस्टिकेशन आदेशों को वापस लेने की मांग को लेकर निकाला था.
वामपंथी छात्र संगठनों (AISA आदि) का आरोप है कि जब वे ईस्ट गेट की ओर मार्च कर रहे थे, तब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के सदस्यों ने उन पर पथराव किया और निहत्थे छात्रों पर हमला किया.
दूसरी ओर, ABVP ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए वामपंथी समूहों पर उकसावे की कार्रवाई और गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया है. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कैंपस के भीतर अफरातफरी और तनाव का माहौल साफ देखा जा सकता है.
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन कैंपस में सुरक्षा और तनाव बरकरार है.
गौरतलब है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की कुलपति शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित के इस्तीफे की मांग इस समय काफी तेज हो गई है, जिसके पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं. पहला और सबसे तात्कालिक कारण उनके द्वारा एक हालिया पॉडकास्ट इंटरव्यू में दी गई टिप्पणियाँ हैं. छात्र संघ (JNUSU) का आरोप है कि कुलपति ने दलित और बहुजन समुदाय के खिलाफ "जातिवादी" बयान दिए हैं.
विशेष रूप से, उन्होंने यूजीसी के नए इक्विटी नियमों की आलोचना करते हुए "विक्टिम कार्ड" और "परमानेंट विक्टिमहुड" जैसे शब्दों का प्रयोग किया, जिसकी तुलना उन्होंने अश्वेतों के संघर्ष से की. छात्रों का मानना है कि ये टिप्पणियाँ ऐतिहासिक उत्पीड़न को खारिज करने वाली और जातिवादी मानसिकता को दर्शाती हैं.
दूसरा कारण प्रशासनिक निर्णयों को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद है. इसमें छात्र संघ के पदाधिकारियों का निलंबन (Rustication) और उन पर लगाया गया भारी जुर्माना शामिल है, जो अंबेडकर लाइब्रेरी में सीसीटीवी कैमरों के विरोध से जुड़ा था.
इसके अलावा, जेएनयू शिक्षक संघ (JNUTA) ने भी पहले राष्ट्रपति को पत्र लिखकर उन्हें हटाने की मांग की थी, जिसमें उन पर सत्ता के दुरुपयोग, नियमों के उल्लंघन और एक युवा फैकल्टी सदस्य की कथित गलत तरीके से सेवा समाप्ति जैसे आरोप लगाए गए थे.
हालाँकि, कुलपति ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनके बयानों को संदर्भ से बाहर लिया गया है और वे स्वयं बहुजन पृष्ठभूमि से आती हैं. उन्होंने स्पष्ट किया है कि प्रशासन केवल करदाताओं के पैसे और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है.