जिंदल स्टील को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से बड़ी राहत
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने जिंदल स्टील लिमिटेड को एक बड़ी कानूनी राहत देते हुए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) द्वारा जारी 153.55 करोड़ रुपये के डिमांड नोटिस और रिकवरी की कार्यवाही पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने इस विवाद को लेकर राज्य बिजली नियामक आयोग (CSERC) को निर्देश दिया है कि वह कंपनी का पक्ष दोबारा सुने और फिर नया फैसला ले.
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की खंडपीठ ने मंगलवार (2 जून, 2026) को यह फैसला सुनाते हुए एकल पीठ के उस पुराने आदेश को रद्द कर दिया, जिसने जिंदल स्टील की याचिका खारिज कर दी थी. कोर्ट ने माना कि शुरुआती स्तर पर कंपनी को अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिला, जिससे निर्णय लेने की पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई.
यह विवाद साल 2011 में जिंदल स्टील और CSPDCL के बीच हुए एक पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) से जुड़ा है. इसके तहत जिंदल स्टील को रायगढ़ स्थित अपने कैप्टिव पावर प्लांट से बिजली की आपूर्ति करनी थी. समझौते के मुताबिक, जिंदल स्टील ने वित्तीय वर्ष 2011-12 और 2012-13 में बिजली सप्लाई की और बिल भेजे, जिसका भुगतान CSPDCL ने बिना किसी विरोध के क्रमशः 2.42 रुपये और 2.66 रुपये प्रति यूनिट की औसत दर से किया.
लेकिन बाद में, CSPDCL ने टैरिफ निर्धारण को लेकर नियामक आयोग का रुख किया, जहां बिजली की दरों और वर्गीकरण में बदलाव के बाद 7 जुलाई, 2016 को जिंदल स्टील को 153.55 करोड़ रुपये का रिकवरी नोटिस थमा दिया गया. CSPDCL का दावा था कि कंपनी को अतिरिक्त भुगतान किया गया है.
जिंदल स्टील ने इस मांग को मनमाना और समझौते के खिलाफ बताया था. कंपनी का यह भी कहना था कि इस विवादित डिमांड के कारण उसे पावर एक्सचेंज के जरिए शॉर्ट-टर्म ओपन एक्सेस के लिए जरूरी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NoC) नहीं मिल पा रहा था, जिससे उनका बिजली व्यापार ठप हो गया था.
इस मामले पर 8 मई को सुनवाई पूरी करने के बाद खंडपीठ ने इस हफ्ते मंगलवार को अपना निर्णय दिया. हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) जिंदल स्टील को अपनी बात रखने का पूरा और उचित अवसर देगा. जब तक आयोग इस मामले में दोनों पक्षों को सुनकर नया फैसला नहीं ले लेता, तब तक करोड़ों रुपये के इस डिमांड नोटिस और वसूली की सभी कार्रवाइयों पर रोक लगी रहेगी.