यासिर अराफात के ओस्लो समझौते पर जेफ्री एपस्टीन की काली छाया
वाशिंगटन । डेस्क: 1993 के ऐतिहासिक ओस्लो समझौते के मुख्य सूत्रधार रहे नॉर्वेजियन राजनयिक टेर्जे रोड-लार्सन और कुख्यात अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के बीच उजागर हुए गहरे संबंधों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है. अमेरिकी न्याय विभाग की फाइलों और नॉर्वे के मीडिया संस्थानों जैसे NRK की जांच से पता चला है कि रोड-लार्सन ने एपस्टीन के साथ मिलकर वित्तीय लेन-देन और वीजा धोखाधड़ी जैसे अनैतिक कार्यों को अंजाम दिया.
यह खुलासा इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि ओस्लो समझौता इजरायल और फिलीस्तीन मुक्ति संगठन (PLO) के बीच हुआ वह ऐतिहासिक शांति समझौता था, जिसने फिलीस्तीन को स्व-शासन का अधिकार देने और दो-राज्य समाधान (Two-State Solution) की नींव रखी थी. इस समझौते पर इजरायली प्रधानमंत्री यित्जाक राबिन और PLO नेता यासिर अराफात ने वाशिंगटन में हस्ताक्षर किए थे, जिसका उद्देश्य दशकों पुराने संघर्ष को समाप्त करना था.
हालांकि, अब सामने आए दस्तावेजों से यह आशंका बलवती हो गई है कि क्या इस शांति प्रक्रिया को एपस्टीन जैसे विवादास्पद व्यक्ति के माध्यम से प्रभावित किया गया था.
रिपोर्टों के अनुसार, एपस्टीन ने रोड-लार्सन को $130,000 का व्यक्तिगत ऋण दिया था और अपनी वसीयत में रोड-लार्सन के बच्चों के लिए $10 मिलियन की भारी-भरकम राशि छोड़ी थी. इसके बदले में, रोड-लार्सन ने 'इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट' (IPI) के अपने प्रभाव का उपयोग कर एपस्टीन द्वारा तस्करी की गई महिलाओं के लिए अमेरिकी वीजा की सिफारिशें कीं.
फिलीस्तीनी नेता मुस्तफा बरगुती जैसे विशेषज्ञों का तर्क है कि एपस्टीन के इजरायली खुफिया एजेंसी 'मोसाद' और पूर्व इजरायली प्रधानमंत्री एहुद बराक के साथ करीबी संबंध थे. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या शांति वार्ता के मध्यस्थ के रूप में रोड-लार्सन की निष्पक्षता को ब्लैकमेल या वित्तीय प्रलोभनों के जरिए इजरायली हितों के पक्ष में मोड़ा गया था.
इस घोटाले ने उन गुप्त दस्तावेजों की मांग तेज कर दी है जो ओस्लो वार्ता के दौरान आधिकारिक अभिलेखागार से गायब हो गए थे, ताकि यह पता चल सके कि शांति की इस मेज पर वास्तव में पर्दे के पीछे क्या खेल चल रहा था.