जयशंकर ने लादेन का जिक्र कर US को दी नसीहत
FM जयशंकर ने लादेन का जिक्र कर US को दी नसीहत
नई दिल्ली । डेस्क: भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी के बावजूद हाल के दिनों में दोनों देशों के संबंधों में ठंडक देखी जा रही है. दूसरी ओर, अमेरिका का पाकिस्तान के प्रति बढ़ता रुझान चर्चा का विषय बना हुआ है.
इस बीच, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कुख्यात आतंकी ओसामा बिन लादेन का जिक्र कर अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों पर तंज कसा है. उन्होंने वाशिंगटन और इस्लामाबाद की "इतिहास भूलने की बीमारी" पर भी टिप्पणी की.
23 अगस्त 2025 को एक कार्यक्रम में जयशंकर ने अमेरिका-पाकिस्तान के बीच हालिया नजदीकियों पर सवालों का जवाब देते हुए कहा, "इन दोनों देशों का एक-दूसरे के साथ इतिहास रहा है, लेकिन वे इतिहास को नजरअंदाज करना भी पसंद करते हैं."
उन्होंने 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिकी कमांडो द्वारा बिन लादेन को मारने की घटना का जिक्र करते हुए कहा, "मजेदार बात है कि अमेरिकी सेना कभी-कभी किसी को प्रमाणपत्र देती है, वही सेना जो एबटाबाद में घुसी थी और वहां छिपे व्यक्ति को ढूंढ निकाला था. जब कोई देश सुविधावादी राजनीति को प्राथमिकता देता है, तो ऐसा होता है."
9/11 हमले और बिन लादेन का खात्मा
2001 में 11 सितंबर को अल कायदा ने अमेरिका में आत्मघाती हमले किए थे, जिसमें न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, पेंटागन और पेनसिल्वेनिया में हमले हुए. इन हमलों में 3,000 से अधिक लोग मारे गए और करीब 6,000 घायल हुए. अल कायदा के सरगना बिन लादेन को इसका मास्टरमाइंड माना गया. 2 मई 2011 को अमेरिकी कमांडो ने 'ऑपरेशन नेपच्यून स्पीयर' के तहत पाकिस्तान के एबटाबाद में बिन लादेन को मार गिराया. इस घटना के बाद अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों में तनाव आया, क्योंकि पाकिस्तान ने दावा किया कि उसे बिन लादेन की मौजूदगी की जानकारी नहीं थी. हालांकि, अमेरिका ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना के कुछ जनरल बिन लादेन को शरण दे रहे थे.
पाक-अमेरिका नजदीकी के पीछे रणनीति
जयशंकर ने हाल के घटनाक्रमों पर टिप्पणी करते हुए संकेत दिया कि अमेरिका की पाकिस्तान के प्रति नरमी के पीछे रणनीतिक हित हो सकते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल-ईरान तनाव के बीच अमेरिका पश्चिम एशिया में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल कर सकता है. खासकर, बलूचिस्तान की सीमा का उपयोग अमेरिकी सेना के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है. जून 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और पाक सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर की व्हाइट हाउस में मुलाकात के बाद ऐसी अटकलें तेज हुईं कि बलूचिस्तान का हवाई क्षेत्र अमेरिका को उपलब्ध कराया गया.
पाकिस्तान की आर्थिक मदद में कटौती
बिन लादेन की मौत के बाद अमेरिका ने पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक सहायता में भारी कटौती की थी. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक से ऋण प्राप्त करना भी पाकिस्तान के लिए मुश्किल हो गया था. हालांकि, हाल के दिनों में अमेरिका और पाकिस्तान के बीच फिर से नजदीकियां बढ़ी हैं. जुलाई 2025 में ट्रम्प ने पाकिस्तान के तेल और दुर्लभ खनिज भंडारों पर सहयोग की बात कही. विश्लेषकों का मानना है कि बलूचिस्तान के खनिज भंडार, जो इलेक्ट्रॉनिक्स और सैन्य तकनीक के लिए महत्वपूर्ण हैं, अमेरिका के लिए आकर्षण का केंद्र हैं.
भारत-पाक तनाव और अमेरिका की भूमिका
अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिन्दूर' शुरू किया, जिसमें भारतीय सेना ने पाकिस्तानी वायुसेना के कई ठिकानों को नष्ट किया. इस दौरान ट्रम्प ने भारत-पाक तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थता का दावा किया, जिसे नई दिल्ली ने खारिज कर दिया, लेकिन इस्लामाबाद ने स्वीकार किया. पाक सेनाध्यक्ष मुनीर ने ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की बात भी कही.