जैकी डोर्सी के मैसेजिंग ऐप 'बिटचैट' पर आईटी मंत्रालय का एक्शन, ऐप स्टोर से हटाया गया
नई दिल्ली । डेस्क: केंद्र सरकार के सूचना और प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय ने पूर्व ट्विटर सीईओ जैक डोर्सी के प्राइवेट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म 'बिटचैट' (Bitchat) पर बड़ी कार्रवाई करते हुए इसे ऐप स्टोर से हटाने का आदेश दिया है. सरकारी सूत्रों के अनुसार, कानून और व्यवस्था बनाए रखने की चिंताओं के कारण इस ऐप पर प्रतिबंध लगाया गया है.
यह कदम दिल्ली के जंतर-मंतर पर 2 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान सामने आया, जब इंटरनेट बंद होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने आपस में जुड़े रहने के लिए इस ऐप का सहारा लिया था.
बिटचैट एक डिसेंट्रलाइज्ड मैसेजिंग टूल है जो बिना किसी मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट या सेंट्रलाइज्ड सर्वर के ब्लूटूथ मेश नेटवर्क के जरिए नजदीकी डिवाइसों के बीच संपर्क स्थापित करता है. इसी खूबी के चलते यह ऐप इंटरनेट ब्लैकआउट के दौरान प्रदर्शनकारियों के बीच काफी लोकप्रिय हो रहा था.
इससे पहले जुलाई में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के 'संसद चलो' मार्च के दौरान भी इस ऐप का इस्तेमाल देखा गया था, जिसके बाद गृह मंत्रालय के अधीन भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने ऐप के सोर्स कोड को गिटहब (GitHub) से हटाने के लिए नोटिस जारी किया था.
I4C का कहना था कि बिना नेटवर्क के चलने वाले ऐसे प्लेटफॉर्म से वैध निगरानी और संदिग्धों की पहचान करना मुश्किल हो जाता है, जिससे गैर-कानूनी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है.
दूसरी ओर, डिजिटल स्पेस में सरकार के इस नियंत्रण पर राजनीति भी तेज हो गई है. सीजेपी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मेटा पर सरकार के दबाव में आकर अपनी पार्टी से जुड़े कंटेंट को इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स से हटाने का आरोप लगाया है. यह विवाद ऐसे समय में गहरा रहा है जब सीजेपी ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर एक और बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया है.
गौरतलब है कि बिटचैट (Bitchat) एक डिसेंट्रलाइज्ड (Decentralized) यानी विकेंद्रीकृत मैसेजिंग ऐप है, जो पारंपरिक मैसेजिंग ऐप्स जैसे व्हाट्सएप या टेलीग्राम की तरह काम नहीं करता. साधारण मैसेजिंग ऐप्स को मैसेज भेजने और पाने के लिए सर्वर, मोबाइल इंटरनेट या वाई-फाई कनेक्शन की आवश्यकता होती है, जबकि बिटचैट ब्लूटूथ मेश नेटवर्क (Bluetooth Mesh Network) तकनीक का इस्तेमाल करता है.
इस तकनीक में आपके फोन का ब्लूटूथ आसपास के अन्य फोन के ब्लूटूथ से जुड़कर एक जाल यानी 'मेश' (Mesh) बना लेता है. जब आप कोई मैसेज भेजते हैं, तो वह मैसेज इंटरनेट पर जाने के बजाय पास मौजूद अन्य बिटचैट उपयोगकर्ताओं के फोन के जरिए आगे बढ़ते हुए अंतिम प्राप्तकर्ता (Recipient) तक पहुंच जाता है. यानी बीच के फोन केवल एक रिले (Relay) या सिग्नल बढ़ाने वाले माध्यम की तरह काम करते हैं, लेकिन एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (End-to-End Encryption) के कारण वे मैसेज को पढ़ नहीं सकते.
इस नेटवर्क की सीमा डिवाइसों की दूरी पर निर्भर करती है. आमतौर पर ब्लूटूथ की रेंज 10 से 100 मीटर तक होती है, लेकिन यदि किसी क्षेत्र या भीड़भाड़ वाली जगह पर कई लोग इस ऐप का उपयोग कर रहे हैं, तो मैसेज एक फोन से दूसरे फोन तक चेन की तरह ट्रांसफर होते हुए काफी दूर तक पहुंच सकता है.
चूंकि इसमें किसी केंद्रीय सर्वर या कंपनी का नियंत्रण नहीं होता और ना ही कोई यूजर डेटा या फोन नंबर लिंक होता है, इसलिए इंटरनेट शटडाउन या नेटवर्क पाबंदी के दौरान भी यह ऐप काम करता रहता है और उपयोगकर्ताओं की पहचान गोपनीय बनी रहती है.