लेबनान से अभी नहीं हटेगी इजरायली सेना- नेतन्याहू
नई दिल्ली । डेस्क: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को पहली बार सैन्य नियंत्रण वाले दक्षिणी लेबनानी क्षेत्र का दौरा किया. सैनिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ किया कि जब तक ईरान समर्थित हिजबुल्लाह से खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगी.
नेतन्याहू का यह कड़ा रुख पिछले शुक्रवार को अमेरिका की मध्यस्थता में हुए सुरक्षा समझौते के बाद आया है, जिसके तहत इजरायल को दो 'पायलट जोन' लेबनानी सेना को सौंपने थे. हालांकि, प्रधानमंत्री के इस बयान ने संघर्ष विराम और सेना की वापसी की व्यावहारिक संभावनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
इस सुरक्षा समझौते के मुख्य प्रावधानों के अनुसार, दक्षिणी लेबनान में पूर्ण राज्य संप्रभुता बहाल करने के लिए हिजबुल्लाह जैसे गैर-राज्य सशस्त्र समूहों का पूरी तरह से और सत्यापित निरन्तरता के साथ निरंस्त्रीकरण करना अनिवार्य है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हिजबुल्लाह कभी भी अपने हथियार डालने को तैयार नहीं होगा, जिससे इजरायल को दक्षिणी लेबनान में अनिश्चित काल तक अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए रखने का सीधा मौका मिल जाएगा.
विश्लेषक माइकल यंग और फवाज गेर्गेस जैसे विशेषज्ञों ने इस समझौते को व्यावहारिक रूप से "असंभव" और लेबनान पर एकतरफा बोझ डालने वाला बताया है.
जहां इजरायल इस 10 किलोमीटर गहरे क्षेत्र को अपने उत्तरी समुदायों की सुरक्षा के लिए एक जरूरी बफर जोन बता रहा है, वहीं लेबनान के भीतर इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया है.
लेबनान के संसद अध्यक्ष नबीह बेरी और हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने इस व्यवस्था को एकतरफा "डिक्टेट" बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया है और लड़ाई जारी रखने का संकल्प जताया है.
इस मार्च से शुरू हुए इस भीषण संघर्ष में अब तक 4,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और करीब दस लाख लोग विस्थापित हुए हैं. ऐसे में दोनों पक्षों के अड़ियल रुख के कारण इस नए समझौते के बाद भी क्षेत्र में शांति की उम्मीदें फिलहाल धुंधली नजर आ रही हैं.