ट्रंप की चेतावनी के बाद भी इजरायल ने ईरान पर दागीं मिसाइलें
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका के सख्त रुख और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी को दरकिनार करते हुए इजरायल ने सोमवार सुबह ईरान के केंद्रीय और पश्चिमी हिस्सों पर भीषण हवाई हमले किए हैं. यह कार्रवाई तेहरान की ओर से हाल ही में दागी गई मिसाइलों के जवाब में की गई है. इजरायली वायुसेना के इन हमलों के बाद एक बार फिर पूरे पश्चिम एशिया में बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय युद्ध छिड़ने की आशंका गहरा गई है.
इजरायल ने इस बार ईरान के सैन्य ठिकानों के साथ-साथ उसके दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में स्थित एक बड़े पेट्रोकेमिकल प्लांट को भी निशाना बनाया है. बीते 8 अप्रैल को हुए संघर्ष विराम के बाद यह पहला मौका है जब इजरायल ने ईरान के किसी ऊर्जा केंद्र पर हमला किया है.
इजरायली सेना ने 'माहशहर पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स' पर हमले की पुष्टि की है, वहीं ईरानी मीडिया के अनुसार इस प्लांट के कुछ हिस्सों को भारी नुकसान पहुँचा है. हमलों के बाद ईरान की राजधानी तेहरान, इस्फ़हान, करज और तबरीज़ जैसे बड़े शहरों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिसके बाद तेहरान के इमाम खुमैनी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास के हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया गया.
दिलचस्प बात यह है कि इन हमलों से ठीक कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'फाइनेंशियल टाइम्स' से बातचीत में दावा किया था कि इजरायल और ईरान के बीच नए हमलों का तेहरान के साथ होने वाली उनकी शांति वार्ता पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
ट्रंप ने दोटूक लहजे में कहा था कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मनमानी नहीं कर सकते और इस पूरे मामले में अंतिम फैसला उनका (ट्रंप का) ही होगा. हालांकि, इजरायल के ताजा कदम ने ट्रंप के इन दावों को बड़ी चुनौती दे दी है.
इस तनाव के बीच सोमवार सुबह इजरायल में भी उस समय खतरे के सायरन गूंज उठे, जब यमन की ओर से इजरायल को निशाना बनाकर एक मिसाइल दागी गई. हालांकि, इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. आमतौर पर यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोही ऐसे हमलों की जिम्मेदारी लेते हैं, लेकिन उनकी तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
इजरायल-ईरान के इस सीधे टकराव की आंच पड़ोसी देशों तक भी पहुँचती दिख रही है. ईरान पर हमले के तुरंत बाद सऊदी अरब के अल खर्ज प्रांत में मिसाइल अलर्ट के सायरन बजने लगे, जहां अमेरिकी सैनिकों का 'प्रिंस सुल्तान एयर बेस' स्थित है.
हालांकि, बाद में सऊदी प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में बताते हुए अलर्ट हटा लिया. फिलहाल इस संवेदनशील मामले पर अमेरिकी रक्षा मंत्रालय या व्हाइट हाउस की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे यह साफ नहीं हो सका है कि क्या इजरायल ने इस हमले के लिए अमेरिका से कोई समन्वय किया था या नहीं.