खाड़ी संकट: भारत ने मध्यस्थता की पहल क्यों नहीं शुरू की- जयराम रमेश
नई दिल्ली । डेस्क: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शनिवार को पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हो रही शांति वार्ता को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है. रमेश ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की उभरती स्थिति का हवाला देते हुए मोदी सरकार की 'विश्वगुरु' के दावे पर गंभीर सवाल खड़े किए.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में रमेश ने कहा कि जब पूरी दुनिया इस शांति प्रक्रिया की उम्मीद कर रही है, तब भारत की कूटनीतिक विफलताएं स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं.
कांग्रेस महासचिव ने अपनी बात को पुख्ता करने के लिए सरकार से चार सीधे सवाल पूछे.
पहले सवाल में उन्होंने पूछा कि अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा पाकिस्तान को अलग-थलग करने के दावों के बावजूद पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह नई भूमिका कैसे हासिल कर ली? उन्होंने इसकी तुलना मनमोहन सिंह सरकार से करते हुए कहा कि 2008 के मुंबई हमलों के बाद पाकिस्तान को प्रभावी ढंग से अलग-थलग किया गया था.
दूसरे सवाल में रमेश ने प्रधानमंत्री के अमेरिकी अभियानों 'नमस्ते ट्रंप' और 'हाउडी मोदी' का जिक्र करते हुए पूछा कि भारी निवेश और एकतरफा व्यापार सौदे के बावजूद भारत अमेरिका पर अपना प्रभाव बनाने में क्यों विफल रहा, जिससे पाकिस्तान को यह नया महत्व मिला?
तीसरे सवाल में उन्होंने भारत की ब्रिक्स+ अध्यक्षता पर उंगली उठाते हुए पूछा कि जब ईरान, यूएई और सऊदी अरब जैसे देश इस समूह के सदस्य हैं, तो भारत ने कोई शांति या मध्यस्थता पहल क्यों नहीं शुरू की?
अंत में, चौथे सवाल के रूप में उन्होंने चीन के प्रति सरकार के रवैये की आलोचना की. रमेश ने पूछा कि पिछले अठारह महीनों में चीन के सामने 'कैलिब्रेटेड सरेंडर' से भारत को क्या हासिल हुआ, विशेषकर तब जब चीन ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान की मदद करने और उसे लगातार समर्थन देने में केंद्रीय भूमिका निभाई है.
रमेश ने जोर देकर कहा कि पश्चिम एशिया में शांति जल्द लौटनी चाहिए और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति 28 फरवरी से पहले जैसी होनी चाहिए.