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क्या शी ढीली कर रहे हैं सत्ता की पकड़?

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07 जुल. 2025, 12:46 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

शी जिनपिंग
शी जिनपिंग

नई दिल्ली । डेस्क: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को लोकर कयास लगाये जा रहे हैं कि वे सत्ता पर पकड़ ढ़ीली कर रहें हैं. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, जिन्होंने 2012 में कम्युनिस्ट पार्टी और 2013 में देश की सत्ता हासिल करने के बाद अपने अधिकार को अभूतपूर्व रूप से मजबूत किया, अब क्या सत्ता की पकड़ ढीली कर रहे हैं? माओ ज़ेदुंग के बाद चीन के सबसे शक्तिशाली नेता माने जाने वाले शी के हालिया तीन फैसलों ने ऐसी अटकलों को जन्म दिया है. 


कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये कदम सत्ता हस्तांतरण की ओर इशारा करते हैं, जबकि अन्य इसे केवल प्रशासनिक रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं.


शी जिनपिंग ने 2012 से पार्टी, सरकार और सेना की सत्ता अपने हाथों में केंद्रित रखी थी. उन्होंने संवैधानिक बदलाव के जरिये आजीवन राष्ट्रपति बने रहने का रास्ता भी साफ किया था. लेकिन हाल के उनके कुछ निर्णयों ने दुनिया भर में चर्चा छेड़ दी है. 


पहला, शी ने सरकारी और पार्टी संस्थानों को अधिक स्वायत्तता और जिम्मेदारी दी है. इन संस्थानों को महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लेने की अनुमति दी गई है, जो पहले शी के केंद्रीकृत नियंत्रण में थे. 


दूसरा, इन संस्थानों में आंतरिक सुधार और नये नियम लागू किये गये हैं, जिनमें उनकी कार्यप्रणाली को फिर से परिभाषित करने की बात कही गई है.


तीसरा और सबसे चर्चित निर्णय रहा ब्राजील में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन में शी का न जाना. राष्ट्रपति बनने के बाद यह पहला मौका है जब शी ने इस महत्वपूर्ण वैश्विक मंच पर हिस्सा नहीं लिया और उनकी जगह प्रधानमंत्री ली कियांग को भेजा गया. 


इस कदम ने कई सवाल खड़े किए. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के अंदर कुछ गंभीर मुद्दों को सुलझाने के लिए शी को देश में रुकना पड़ा. कुछ ने इसे उनके घटते प्रभाव के संकेत के रूप में भी देखा.


विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि ये कदम 2027 में शी के तीसरे कार्यकाल की समाप्ति और उसी समय होने वाली पार्टी कांग्रेस को ध्यान में रखकर उठाये गये हैं. 


उनका कहना है कि सत्ता हस्तांतरण के समय पार्टी के अंदर किसी तरह का विवाद न हो, इसलिए शी पहले से ही जिम्मेदारियाँ बाँट रहे हैं. यह भी संभव है कि वे अपने उत्तराधिकारी को तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर चुके हों.


वहीं, दूसरी ओर कुछ विश्लेषक इन अटकलों को अलग नजरिये से देखते हैं. उनका कहना है कि चीन इस समय कई आंतरिक और बाहरी चुनौतियों से जूझ रहा है. अमरीका के साथ चल रहा व्यापार युद्ध, आवास क्षेत्र का संकट, और कोविड-19 महामारी के बाद की आर्थिक मंदी ने देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है. 


कई व्यावसायिक संगठन अभी भी उबर नहीं पाये हैं. ऐसे में शी के लिये सभी मोर्चों को अकेले संभालना मुश्किल हो रहा है. इसलिए, वे सत्ता का विकेंद्रीकरण कर रहे हैं ताकि प्रशासनिक बोझ कम हो.


हालांकि, कुछ विशेषज्ञ इन सभी अटकलों को सिरे से खारिज करते हैं. उनका कहना है कि शी न तो सत्ता छोड़ रहे हैं और न ही उनकी पकड़ कमजोर हुई है. बल्कि, वे कुछ "बड़े और महत्वपूर्ण" मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिसके लिए उन्होंने रोजमर्रा के कार्यों का दायित्व दूसरों को सौंपा है. 


उनका मानना है कि यह कदम केवल कार्यकुशलता बढ़ाने के लिये उठाया गया है, न कि सत्ता हस्तांतरण की तैयारी.


इन जटिल परिस्थितियों के बीच, शी जिनपिंग के अगले कदम पर न केवल चीन, बल्कि पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है. क्या यह वाकई सत्ता हस्तांतरण की शुरुआत है, या सिर्फ एक रणनीतिक बदलाव? यह सवाल अभी अनुत्तरित है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP