क्या ममता की TMC टूट रही है?
कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर गहरा सांगठनिक संकट और बिखराव के संकेत उभरने लगे हैं. चुनाव परिणामों के बाद पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और दलबदल की तेज होती अटकलों के बीच, पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने कोलकाता के कालीघाट स्थित अपने आवास पर एक महत्वपूर्ण आपातकालीन बैठक बुलाई.
इस बैठक में तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी भी मौजूद रहे. बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनाव हार चुके और निराश उम्मीदवारों को एकजुट रखना था, जिससे यह साफ झलकता है कि पार्टी इस समय आंतरिक रूप से बड़े संकट से गुजर रही है.
पार्टी के भीतर मचे इस घमासान और संभावित टूट के डर को ममता बनर्जी के कड़े रुख से भी भांपा जा सकता है. बैठक में उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, "जो लोग दूसरी पार्टियों में जा रहे हैं, उन्हें जाने दें. मैं पार्टी का नए सिरे से पुनर्गठन करूंगी."
नेताओं के पाला बदलने की आशंका को उन्होंने चुनाव नतीजों के तुरंत बाद बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी स्वीकार किया था, जहां उन्होंने कहा था कि कई लोग अपनी मजबूरियों के चलते पार्टी छोड़ सकते हैं और वह किसी को जबरन नहीं रोकेंगी.
ममता बनर्जी का यह बयान इस बात का सीधा संकेत है कि चुनावी हार के बाद टीएमसी को अपने नेताओं के एक बड़े हिस्से के छिटकने का डर सता रहा है.
टीएमसी के लिए यह राजनीतिक अस्तित्व का अब तक का सबसे कठिन दौर माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी सीधे सत्ता से बेदखल होकर विपक्ष के पायदान पर आ गिरी है.
राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से पार्टी को केवल 80 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा, जबकि उसके 211 उम्मीदवार चुनाव हार गए, जिनमें कई वरिष्ठ नेता और मंत्री शामिल हैं.
सबसे बड़ा झटका खुद ममता बनर्जी को लगा, जो अपने ही राजनीतिक गढ़ भवानीपुर से चुनाव हार गईं.
ममता बनर्जी द्वारा कार्यकर्ताओं से पार्टी कार्यालयों को फिर से खोलने और रंगने की अपील करना तथा 'जनादेश लूटे जाने' का आरोप लगाना, वास्तव में बिखरती हुई पार्टी को एकजुट रखने और नेताओं का मनोबल टूटने से बचाने की एक हताश कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.