क्या सुरक्षित निवेश के रूप में फीकी पड़ रही है सोने की चमक?
वाशिंगटन । डेस्क: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान के खिलाफ युद्ध के 18वें दिन भी वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों ने जानकारों को हैरान कर दिया है. सामान्यतः युद्ध और अनिश्चितता के दौर में जब निवेशक जोखिम से बचने के लिए सोने की ओर भागते हैं, इस बार पीली धातु की कीमतें आश्चर्यजनक रूप से स्थिर बनी हुई हैं.
मंगलवार को हाजिर सोना $5,001.36 प्रति औंस के स्तर पर लगभग फ्लैट कारोबार करता दिखा, जबकि अमेरिकी सोना वायदा में भी महज 0.1 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखी गई.
28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के शुरुआती हमलों के बाद से संघर्ष क्षेत्रीय स्तर पर फैल चुका है. 2 मार्च को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) द्वारा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार निकल गईं, लेकिन सोने में वैसी तेजी नहीं दिखी जैसी रूस-यूक्रेन युद्ध के समय देखी गई थी.
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस स्थिरता के पीछे कई बड़े कारण हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति इस समय सोने पर भारी पड़ रही है. बढ़ती मुद्रास्फीति को देखते हुए ट्रेडर्स को उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती रोक सकता है या भविष्य में दरें बढ़ा भी सकता है. चूंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता, इसलिए उच्च ब्याज दरों के माहौल में डॉलर और अन्य संपत्तियां अधिक आकर्षक हो जाती हैं.
इसके अलावा, डॉलर की मजबूती ने भी सोने की राह रोकी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना डॉलर में ट्रेड होता है, ऐसे में मजबूत डॉलर इसे अन्य मुद्रा धारकों के लिए महंगा बना देता है. फ्रांसीसी संस्थान 'एपिस्टेलेम' के विश्लेषकों का कहना है कि सोना पहले से ही अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तरों के करीब कारोबार कर रहा है, जिसके कारण इसमें नए निवेश की गुंजाइश कम बची है.
एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू निवेशकों का बदलता नजरिया है. अब सोने को 'सुरक्षित पनाहगाह' के बजाय एक 'सट्टेबाजी वाली संपत्ति' के रूप में देखा जाने लगा है. केंद्रीय बैंक, जो पारंपरिक रूप से सोने के सबसे बड़े खरीदार रहे हैं, वर्तमान अस्थिरता को देखते हुए जोखिम लेने से बच रहे हैं.
हालांकि, बाजार के जानकारों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है या अमेरिका में मई के दौरान फेडरल रिजर्व के नेतृत्व में बदलाव के बाद ब्याज दरों को लेकर कोई नरम संकेत मिलता है, तो सोने की कीमतों में फिर से हलचल देखी जा सकती है. फिलहाल, निवेशक 'इंतजार करो और देखो' की नीति अपना रहे हैं, जिससे सोने की चमक युद्ध के बावजूद फीकी नजर आ रही है.