क्या बीजिंग बन रहा है दुनिया का नया आर्थिक केंद्र?
नई दिल्ली । डेस्क: वाशिंगटन की बदलती नीतियों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े व्यापारिक रुख ने वैश्विक राजनीति में एक बड़ा खालीपन पैदा कर दिया है, जिसे भरने के लिए चीन ने अपनी सक्रियता तेज कर दी है. साल 2026 की शुरुआत से ही बीजिंग अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का मुख्य केंद्र बना हुआ है, जहाँ अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी देश एक-एक करके चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय संबंधों को 'रीसेट' करने पहुंच रहे हैं.
हाल के हफ्तों में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे मायुंग, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, फिनलैंड के पेटेरी ओर्पो और आयरिश नेता माइकल मार्टिन की बीजिंग यात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दुनिया के कई विकसित देश अब अमेरिका के विकल्प के तौर पर चीन की ओर देख रहे हैं.
इस कड़ी में इस सप्ताह ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की तीन दिवसीय बीजिंग यात्रा और फरवरी के अंत में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ का प्रस्तावित दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. ये सभी देश अमेरिका के संधि सहयोगी रहे हैं, लेकिन पिछले एक साल में ट्रंप प्रशासन द्वारा स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो पार्ट्स पर लगाए गए 'पारस्परिक' व्यापार शुल्क (टैरिफ) ने इनके संबंधों में कड़वाहट पैदा कर दी है.
तनाव की पराकाष्ठा इस महीने उस समय देखने को मिली जब कनाडा, फिनलैंड, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे नाटो सहयोगियों का ट्रंप के साथ सीधा गतिरोध हो गया. विवाद की जड़ ट्रंप की ग्रीनलैंड को हथियाने की इच्छा और उन आठ यूरोपीय देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी थी, जो उनके इस विचार के आड़े आ रहे थे.
हालांकि ट्रंप ने बाद में इन धमकियों से हाथ खींच लिए, लेकिन इसने यूरोपीय शक्तियों के मन में असुरक्षा का भाव पैदा कर दिया है. इसी अनिश्चितता का लाभ उठाने के लिए चीन ने दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच के शिखर सम्मेलन में खुद को 'बहुपक्षवाद' और 'मुक्त व्यापार' के रक्षक के रूप में पेश किया.
जहाँ एक ओर ट्रंप दावोस में अमेरिका को निवेश के लिए दुनिया का 'सबसे हॉट' देश बता रहे थे, वहीं चीन के उप-प्रधानमंत्री ली हेफेंग ने अपने संबोधन में आर्थिक वैश्वीकरण का समर्थन करते हुए कहा कि एकांतवास में जाने के बजाय संवाद के जरिए समाधान ढूंढना ही एकमात्र रास्ता है. ली ने ट्रंप के व्यापार युद्ध का सीधा नाम लिए बिना वैश्विक व्यापार संगठन के सिद्धांतों के उल्लंघन की आलोचना की और तर्क दिया कि हर देश को अपने वैध अधिकारों की रक्षा करने का हक है.
चीन की इस बदली हुई छवि का असर अब जमीन पर भी दिखने लगा है. विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल नॉर्थ, यानी विकसित पश्चिमी देश, अब चीन की बातों को गंभीरता से सुन रहे हैं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण लंदन में चीन के 'मेगा दूतावास' को मिली मंजूरी और इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर यूरोप और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद में प्रगति है.
कनाडा में भी कूटनीतिक बदलाव की आहट साफ है, जहाँ प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने चीन के साथ कृषि उत्पादों और इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैरिफ कम करने का समझौता किया है. यह 2017 के बाद किसी कनाडाई प्रधानमंत्री की पहली चीन यात्रा थी, जिसने 2018 के हुआवेई कार्यकारी मेंग वानझू मामले के बाद जमे हुए बर्फ को पिघलाने का काम किया है.
हालांकि, ट्रंप ने इस समझौते पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कनाडा को 100 प्रतिशत टैरिफ की धमकी दी है और मार्क कार्नी को चेतावनी दी है कि वे कनाडा को चीन के लिए 'ड्रॉप ऑफ पोर्ट' न बनने दें. इसके बावजूद, कार्नी ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान अमेरिकी माहौल 'सामान्य' नहीं है और कनाडा को अमेरिका से इतर अपने व्यापारिक समझौतों में विविधता लाने की जरूरत है.
चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच कुछ चुनौतियां भी बरकरार हैं. पूर्व अमेरिकी राजनयिकों का मानना है कि जब अमेरिका लेन-देन की राजनीति (ट्रान्सेक्शनल पॉलिटिक्स) पर उतर आता है, तो एक शून्य पैदा होता है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि चीन इसे पूरी तरह भर पाएगा या नहीं. कई देश अभी भी अमेरिका और चीन के बीच किसी एक को चुनने के बजाय दोनों के साथ संतुलन बनाना चाहते हैं.
चीन का 1.2 ट्रिलियन डॉलर का विशाल व्यापार अधिशेष भी एक बड़ी चिंता का विषय है. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों जैसे नेताओं ने चीन से निवेश का स्वागत तो किया है, लेकिन साथ ही चीन की 'अत्यधिक क्षमता' और बाजार में सामान डंप करने की प्रवृत्ति पर सवाल भी उठाए हैं.
चीन ने इन चिंताओं को दूर करने की कोशिश करते हुए खुद को दुनिया के 'बाजार' के रूप में पेश किया है, लेकिन यह भी कहा है कि जब चीन कुछ खरीदना चाहता है, तो अक्सर सुरक्षा कारणों का हवाला देकर उसे सामान नहीं बेचा जाता.
वर्तमान परिदृश्य में, वाशिंगटन की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति ने बीजिंग को एक ऐसा मौका दिया है जिसे वह दुनिया के सामने खुद को एक 'स्थिर और जिम्मेदार वैश्विक अभिनेता' साबित करने के लिए पूरी ताकत से भुना रहा है.