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ईरान पर महाविनाशक 'ग्रेविटी बम' गिराने की तैयारी में अमेरिका?

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06 मार्च 2026, 03:36 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

पीट हेगसेथ
पीट हेगसेथ

वॉशिंगटन । डेस्क: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा सैन्य गतिरोध अब अपने सबसे विनाशकारी चरण में पहुंचता दिख रहा है. पेंटागन के प्रमुख और अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के होश उड़ा देने वाले दावों ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है. विभिन्न रक्षा सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि अमेरिका अब ईरान के खिलाफ अपने सबसे घातक और आधुनिक 'प्रिसिजन ग्रेविटी बम' (Precision Gravity Bomb) का इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है. 


हेगसेथ ने खुले तौर पर चेतावनी दी है कि अमेरिकी सेना अगले सात दिनों के भीतर ईरान की पूरी हवाई सीमा को अपने नियंत्रण में ले लेगी. उनके अनुसार, यह सैन्य अभियान अभी अपने पहले चरण में है और आने वाले दिनों में हमले और भी भीषण होने वाले हैं.


इस तनाव की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले मंगलवार को अमेरिका ने कैलिफोर्निया में ‘मिनटमैन-3’ (Minuteman III) मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. रक्षा विशेषज्ञों ने इसे ‘डूम्सडे’ या ‘कयामत की मिसाइल’ का नाम दिया है. यह अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल कितनी खतरनाक है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह हिरोशिमा पर गिराए गए 'लिटिल बॉय' परमाणु बम की तुलना में 20 गुना अधिक शक्तिशाली परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. 


इस परीक्षण के तुरंत बाद अमेरिका ने संकेत दिया है कि यदि ईरान के खिलाफ युद्ध तेज होता है, तो वह ग्रेविटी बम जैसे अत्यंत घातक हथियारों के प्रयोग से पीछे नहीं हटेगा.


अमेरिकी रक्षा सचिव का दावा है कि युद्ध के शुरुआती चार दिनों के भीतर ही ईरान की वायु रक्षा प्रणाली को भारी नुकसान पहुंचाया गया है. रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना ने पहले ही 226 किलोग्राम, 450 किलोग्राम और 900 किलोग्राम वजनी ग्रेविटी बमों को रणनीतिक ठिकानों पर तैनात करना शुरू कर दिया है. 


ये 'फ्री फॉल' बम किसी इंजन या प्रोपल्शन सिस्टम के बिना केवल गुरुत्वाकर्षण की शक्ति से अपने लक्ष्य पर सटीक प्रहार करते हैं. हालांकि इन्हें 'टैक्टिकल अनगाइडेड' बम भी कहा जाता है, लेकिन आधुनिक तकनीक ने इन्हें इतना सटीक बना दिया है कि ये दुश्मन के सबसे मजबूत भूमिगत बंकरों और सैन्य ठिकानों को पल भर में राख कर सकते हैं.


इन बमों की सबसे भयावह विशेषता इनमें मौजूद ‘डायल-ए-यील्ड’ तकनीक है. इस तकनीक के जरिए हमले से पहले यह तय किया जा सकता है कि धमाका कितना बड़ा या छोटा होना चाहिए. कुछ आधुनिक ग्रेविटी बमों में थर्मोन्यूक्लियर तकनीक का इस्तेमाल होता है, जिसमें परमाणु विखंडन (Fission) और संलयन (Fusion) दोनों प्रक्रियाएं सक्रिय होती हैं. 


इसका मतलब है कि एक छोटा सा ग्रेविटी बम किसी खास इमारत से लेकर पूरे शहर को तबाह करने की क्षमता रखता है. अमेरिका और इजरायल की इस साझा सैन्य आक्रामकता ने पश्चिम एशिया में एक पूर्ण परमाणु युद्ध की आशंका को जन्म दे दिया है, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP