लालू यादव, तेजस्वी यादव पर IRCTC होटल घोटाला मामले में आरोप तय
नई दिल्ली । डेस्क: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों को एक बड़ा झटका देते हुए, दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें IRCTC होटल घोटाला मामले में आरोपी मानते हुए उनके खिलाफ आरोप तय करने का फैसला किया है.
अपने फैसले को सुनाते हुए, राउज एवेन्यू कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120B (आपराधिक साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने का रास्ता साफ कर दिया है. सभी आरोपियों ने खुद को निर्दोष बताया है.
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने लालू प्रसाद, तेजस्वी यादव, प्रेम गुप्ता, सरला गुप्ता और रेलवे अधिकारियों राकेश सक्सेना व पी.के. गोयल के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप तय करने पर 29 मई को विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था.
यह कथित घोटाला 2004 से 2009 के बीच हुआ था जब लालू प्रसाद केंद्र में रेल मंत्री थे. आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान, IRCTC के दो होटलों के रखरखाव का ठेका एक फर्म को नियमों का पालन किए बिना दिया गया था.
मामला दो IRCTC होटलों के रखरखाव के अनुबंध में कथित अनियमितताओं से संबंधित है. इनमें से एक होटल सरला गुप्ता को आवंटित किया गया था, जो लालू प्रसाद के करीबी दोस्त और तत्कालीन राज्यसभा सांसद प्रेम गुप्ता की पत्नी हैं. अभियोजन पक्ष के अनुसार, राजद नेता ने एक बेनामी कंपनी के माध्यम से तीन एकड़ प्रमुख भूमि प्राप्त की थी.
लालू प्रसाद ने अपने हिस्से पर कोई अनियमितता न होने का दावा करते हुए कहा कि टेंडर निष्पक्ष रूप से दिए गए थे और उन्होंने खुद को बरी करने की मांग की थी.
हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने लालू प्रसाद की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था, जिसमें उन्होंने जमीन के बदले नौकरी मामले में निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की थी.
यह कदम तब उठाया गया जब निचली अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दायर कई आरोपपत्रों का संज्ञान लिया. CBI के अनुसार, 2004-2009 के दौरान, लालू प्रसाद ने रेलवे के विभिन्न क्षेत्रों में ग्रुप 'डी' के पदों पर नियुक्तियों के बदले अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर जमीन के हस्तांतरण के रूप में आर्थिक लाभ प्राप्त किया था.