ईरान युद्ध: अमेरिकी सीनेट में ट्रंप के सैन्य अधिकार सीमित करने का प्रस्ताव पास
वाशिंगटन । डेस्क: अमेरिकी सीनेट ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए उस युद्ध शक्तियों के प्रस्ताव (वॉर पावर्स रिजॉल्यूशन) को आगे बढ़ा दिया है, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कांग्रेस की मंजूरी के बिना ईरान के खिलाफ सैन्य बल का उपयोग करने से रोक सकता है. ईरान के साथ बढ़ते संघर्ष और उसके वैश्विक प्रभावों के बीच सीनेट में यह विधायी प्रक्रिया शुरू हुई है.
मंगलवार को इस प्रक्रियात्मक उपाय (प्रोसीजरल मेजर) पर हुए मतदान में प्रस्ताव के पक्ष में 50 और विपक्ष में 47 वोट पड़े. इस दौरान कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने अपनी ही पार्टी के राष्ट्रपति के खिलाफ जाकर डेमोक्रेटिक सहयोगियों का साथ दिया, जिसे राष्ट्रपति ट्रंप के लिए एक दुर्लभ और बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है.
मतदान के परिणाम दर्शाते हैं कि रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी अब एक छोटा लेकिन बढ़ता हुआ धड़ा इस अंतहीन युद्ध को लेकर असहज है और राष्ट्रपति के फैसलों को चुनौती देने के लिए तैयार है.
इस वोटिंग से पहले सीनेट में डेमोक्रेटिक अल्पमत के नेता चक शूमर ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह राष्ट्रपति एक भरे हुए हथियार के साथ खेलने वाले बच्चे की तरह व्यवहार कर रहे हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान के साथ शत्रुता से सैनिकों को वापस लेने के लिए इस युद्ध शक्तियों के प्रस्ताव का समर्थन करने का यह सबसे सही समय है.
यह नतीजा उन कानूनविदों के लिए भी एक बड़ी जीत है जो लंबे समय से तर्क दे रहे हैं कि अमेरिकी संविधान के अनुसार सैनिकों को युद्ध में भेजने की शक्ति राष्ट्रपति के पास नहीं, बल्कि संसद (कांग्रेस) के पास होनी चाहिए.
हालांकि, यह केवल एक प्रक्रियात्मक वोट था और इस प्रस्ताव को अंतिम रूप से लागू होने में अभी कई कठिन बाधाओं को पार करना होगा. गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा फरवरी के अंत में ईरान के खिलाफ शुरू किए गए इस युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है और अमेरिका में जीवनयापन की लागत बढ़ा दी है.
डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन सांसदों का मानना है कि राष्ट्रपति ने देश को एक ऐसे लंबे संघर्ष में झोंक दिया है, जिसकी कोई स्पष्ट निकास रणनीति (एग्जिट स्ट्रेटजी) नहीं है.
दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन का कहना है कि राष्ट्रपति के कदम पूरी तरह कानूनी हैं और कमांडर-इन-चीफ के रूप में सीमित सैन्य अभियान चलाने का अधिकार उनके पास सुरक्षित है. 1973 के अमेरिकी युद्ध शक्तियों के कानून के तहत राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की मंजूरी के केवल 60 दिनों तक सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि 1 मई को युद्धविराम के साथ ही शत्रुता समाप्त हो गई थी, इसलिए उन्होंने 60 दिनों की सीमा का उल्लंघन नहीं किया है. हालांकि, अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी जहाजों पर जवाबी हमलों के कारण जमीनी स्तर पर तनाव अब भी बरकरार है. विशेषज्ञों और जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार, अमेरिकी जनता भी इस युद्ध के खिलाफ है.