ईरान युद्ध: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने लगाया अंकुश, ट्रंप के पास वीटो का दांव
वॉशिंगटन । डेस्क: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़े गए युद्ध को रोकने के पक्ष में मतदान किया है. यह संघर्ष पिछले चार महीनों से जारी है और शांति वार्ताओं में दोनों पक्ष किसी ठोस समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं. सांसदों का यह कदम उस युद्ध को समाप्त करने का पहला सफल प्रयास है, जिसने हजारों नागरिकों की मौत और वैश्विक व्यापार में भारी व्यवधान जैसी विनाशकारी स्थितियां पैदा की हैं.
इस युद्ध को लेकर खुद ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी असंतोष बढ़ रहा है, क्योंकि अमेरिकी जनता पर इसका सीधा असर पड़ रहा है और ट्रंप अब तक ईरान के साथ कोई स्थायी समझौता करने में विफल रहे हैं.
हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप के पास मौजूद वीटो पावर और संसद के दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी के दबदबे के कारण फिलहाल इस मतदान को काफी हद तक प्रतीकात्मक माना जा रहा है, फिर भी यह सांसदों की ओर से राष्ट्रपति की नीतियों की एक बड़ी आलोचना है.
बुधवार को डेमोक्रेट्स के नेतृत्व में प्रतिनिधि सभा ने 'वॉर पावर्स एक्ट' लागू करने के पक्ष में मतदान किया. यह कानून कांग्रेस को राष्ट्रपति द्वारा बिना मंजूरी के शुरू किए गए विदेशी सैन्य संघर्षों को रोकने की शक्ति देता है.
युद्ध की शुरुआत से ही डेमोक्रेट्स का तर्क रहा है कि युद्ध की घोषणा करने का अधिकार केवल संसद के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं. उन्होंने 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए इस युद्ध को रोकने के लिए तीन बार प्रयास किए, लेकिन पिछले सभी प्रयास विफल रहे थे.
इस बार प्रस्ताव के पक्ष में 215 और विपक्ष में 208 वोट पड़े. डेमोक्रेट्स को यह सफलता तब मिली जब चार रिपब्लिकन सांसदों मिशिगन के टॉम बैरेट, ओहियो के वॉरेन डेविडसन, केंटकी के थॉमस मैसी और पेंसिलवेनिया के ब्रायन फिट्ज़पैट्रिक ने पार्टी लाइन से अलग जाकर ट्रंप की नीतियों के खिलाफ मतदान किया.
इस मतदान के बावजूद ट्रंप के सैन्य कदमों पर तुरंत रोक लगना मुश्किल है, क्योंकि इसके बाद इस प्रस्ताव को सीनेट से भी पारित होना होगा, जहां रिपब्लिकन पार्टी के पास मामूली बहुमत है. दो सप्ताह पहले सीनेट में इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए मतदान हुआ था, जो 50-47 से खारिज हो गया था.
यदि सीनेट इसे पारित कर भी देती है, तो राष्ट्रपति ट्रंप इस पर वीटो लगा सकते हैं, जिसे पलटने के लिए कांग्रेस को दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, जो मौजूदा राजनीतिक माहौल में अवास्तविक लगता है.
इस बीच, अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि 8 अप्रैल से लागू संघर्ष विराम के कारण अमेरिका तकनीकी रूप से युद्ध में नहीं है, जबकि अमेरिकी सेना ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखे हुए है. रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी संकेत दिया है कि संघर्ष विराम के बाद समय सीमा फिर से शुरू हो गई है, जिससे प्रशासन संसद की अनुमति के बिना ईरान पर दोबारा हमले शुरू करने का अधिकार रखता है.