ईरान युद्ध: क्या अमेरिका के पास लंबे संघर्ष के लिए पर्याप्त गोला-बारूद है?
बीजिंग । डेस्क: वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ता तनाव अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर हमलों को चार से पांच सप्ताह तक जारी रखने के संकेत दिए जाने के बाद, रक्षा विशेषज्ञों ने अमेरिकी गोला-बारूद के भंडार और उसकी औद्योगिक क्षमता पर गंभीर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं.
न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉल स्ट्रीट जर्नल जैसी प्रमुख मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पेंटागन के भीतर इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि ईरान के साथ एक लंबा और उच्च-तीव्रता वाला युद्ध अमेरिकी सैन्य रणनीतियों के लिए महत्वपूर्ण 'स्ट्रैटेजिक रिजर्व' को पूरी तरह खत्म कर सकता है.
चीनी सैन्य विशेषज्ञों और वैश्विक विश्लेषकों का मानना है कि हालांकि अमेरिका ने इन हमलों के लिए बड़े पैमाने पर तैयारी की है, लेकिन उसके रक्षा औद्योगिक आधार में आई गिरावट और सीमित भंडार एक लंबे युद्ध को झेलने की क्षमता को बाधित कर सकते हैं.
ज्वॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन ने पहले ही चेतावनी दी थी कि मध्य पूर्व में छोटे या मध्यम स्तर के हमलों के लिए सेना तैयार है, लेकिन इससे अमेरिकी हताहतों की संख्या बढ़ने और हथियारों के स्टॉक पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने का उच्च जोखिम है.
वर्तमान में स्थिति यह है कि अमेरिका ईरान के मिसाइल और ड्रोन बेड़े को नष्ट करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन चुनौती यह है कि वह अपने इंटरसेप्टर मिसाइलों को तेहरान के जवाबी हमलों से बचने के लिए तेजी से खर्च कर रहा है.
स्टिमसन सेंटर की सीनियर फेलो केली ग्रीको के अनुसार, अमेरिका इन हथियारों का उपयोग उनकी उत्पादन गति से कहीं अधिक तेजी से कर रहा है.
यह संकट केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है. इजरायल भी अपने 'एरो 3' वायु रक्षा इंटरसेप्टर की कमी का सामना कर रहा है. गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिकी हथियारों की कमी का मुद्दा नया नहीं है. जुलाई 2025 में भी पेंटागन ने यूक्रेन को दी जाने वाली कुछ सटीक मिसाइलों की खेप रोक दी थी क्योंकि घरेलू भंडार खतरनाक स्तर तक गिर गए थे.
सैन्य विशेषज्ञ झांग जुनशे ने ग्लोबल टाइम्स को बताया कि यदि अमेरिका वर्तमान स्तर की बमबारी जारी रखता है, तो वह इसे लंबे समय तक बनाए रखने में सक्षम नहीं होगा. उनके अनुसार, अमेरिकी रक्षा उद्योग की उत्पादन क्षमता अब उतनी तीव्र नहीं रही कि वह युद्ध के दौरान तेजी से आपूर्ति सुनिश्चित कर सके.
इसके अलावा, वाशिंगटन को अन्य वैश्विक आकस्मिकताओं के लिए भी अपना स्टॉक बचाकर रखना होगा. कुल मिलाकर, यदि ईरान के साथ यह टकराव लंबा खिंचता है, तो यह न केवल अमेरिका की तत्काल सैन्य क्षमता पर दबाव डालेगा, बल्कि उसकी दीर्घकालिक युद्ध तैयारी के लिए भी एक बड़ा खतरा पैदा कर सकता है.