शनि, 17 अक्टू. 2026

CGKhabar

ईरान-अमेरिका युद्ध: $114 के पार पहुंचा कच्चा तेल, दुनिया पर आर्थिक संकट

C

CG Khabar

09 मार्च 2026, 07:51 AM 3 मिनट में पढ़ें 1

तेल
तेल

नई दिल्ली । डेस्क: मध्य पूर्व में अमेरिका और इजरायल के ईरान के साथ बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में तहलका मचा दिया है. रविवार को अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 20 प्रतिशत से अधिक की भारी वृद्धि दर्ज की गई, जिसके चलते तेल की कीमतें 114 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गईं. 


हालांकि, सोमवार सुबह तक कीमतों में मामूली स्थिरता देखी गई और यह 107.50 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा था. साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब कच्चे तेल ने 100 डॉलर प्रति बैरल का मनोवैज्ञानिक स्तर पार किया है. 


इस उछाल का मुख्य कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बड़े व्यवधान की आशंका है, क्योंकि 28 फरवरी को ईरान पर हुए संयुक्त हमलों के बाद से तेल की कीमतों में अब तक 50 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है.


ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाले शिपिंग संचालन को प्रभावी ढंग से रोक दिया है. दुनिया के कुल तेल संचलन का लगभग पांचवां हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, जिससे वैश्विक आपूर्ति पर सीधा खतरा मंडरा रहा है. 


इस तनाव के चलते इराक, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे बड़े ओपेक (OPEC) उत्पादकों को अपने उत्पादन में कटौती करनी पड़ी है, क्योंकि जलमार्ग बंद होने के कारण कच्चे तेल का बैकलाग जमा हो गया है. 


स्थिति तब और गंभीर हो गई जब इजरायल ने शनिवार को पहली बार ईरान के तेल बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर हवाई हमले किए, जिसमें तेहरान और अल्बोरज़ प्रांत के स्टोरेज सेंटर तबाह हो गए. इसके जवाब में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने धमकी दी है कि यदि हमला जारी रहा तो तेल की कीमतें 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं.


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन बढ़ती कीमतों को "अल्पकालिक" बताते हुए खारिज कर दिया है. ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करने के लिए यह एक छोटी सी कीमत है और जल्द ही कीमतें गिरेंगी. 


हालांकि, बाजारों में उनकी इस निश्चिंतता का असर नहीं दिखा. 


सोमवार को एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई. जापान का निक्केई 7 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 8 प्रतिशत तक टूट गया. 


वॉल स्ट्रीट के फ्यूचर्स भी लाल निशान में कारोबार कर रहे हैं. 


अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, तेल की कीमतों में प्रत्येक 10 प्रतिशत की वृद्धि वैश्विक मुद्रास्फीति को 0.4 प्रतिशत बढ़ा सकती है. कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो खाड़ी के सभी निर्यातक जल्द ही 'फोर्स मेज्योर' (Force Majeure) घोषित करने पर मजबूर होंगे, जिससे वैश्विक आर्थिक मंदी का खतरा और गहरा जाएगा.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP