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ईरान-इजरायल युद्ध: होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से भारत में गहराया तेल संकट

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01 मार्च 2026, 03:40 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

होर्मुज जलडमरूमध्य
होर्मुज जलडमरूमध्य

नई दिल्ली । डेस्क: मध्य पूर्व में गहराते सैन्य तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मच गया है. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरानी ठिकानों पर किए गए हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को बंद करने का ऐलान कर दिया है. यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण 'एनर्जी चोकपॉइंट्स' में से एक है, जिसके बंद होने से भारत जैसे प्रमुख तेल उपभोक्ता देशों के लिए बड़ी चुनौतियां पैदा हो गई हैं. 


फरवरी के महीने में ही युद्ध की आशंका के चलते कच्चे तेल की कीमतें 65 डॉलर से बढ़कर 73 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं और अब वास्तविक सैन्य कार्रवाई के बाद इसमें और अधिक तेजी आने की संभावना है.

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भारत के लिए इस संकट के मायने बेहद गंभीर हैं क्योंकि देश अपनी कुल कच्चा तेल खपत का लगभग आधा हिस्सा, यानी करीब 2.6 मिलियन बैरल प्रतिदिन, इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे देशों से आयात करता है. यह पूरा आयात इसी हॉर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है. 


जानकारों का मानना है कि इस मार्ग में किसी भी प्रकार के व्यवधान से न केवल फिजिकल सप्लाई प्रभावित होगी, बल्कि 'जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम' के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें आसमान छूने लगेंगी. 


इसका सीधा असर भारत के व्यापार घाटे, विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये की मजबूती पर पड़ेगा. माल ढुलाई और बीमा की दरों में बढ़ोतरी से आम आदमी के लिए ईंधन और अन्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं.


हालांकि, भारतीय रिफाइनरी और सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) का उपयोग कर सकता है और उन देशों से तेल की खरीद बढ़ा सकता है जो इस विवादित मार्ग का उपयोग नहीं करते हैं, जैसे कि अमेरिका, नाइजीरिया, अंगोला, ब्राजील और वेनेजुएला. 


हालांकि इन देशों से तेल मंगवाने में माल ढुलाई का खर्च और समय अधिक लगेगा, लेकिन इससे आपूर्ति की निरंतरता बनी रहेगी.


इस संकट के दौरान रूस भारत के लिए एक बड़े 'बफर' के रूप में उभरा है. वर्तमान में रूसी कच्चे तेल से लदे कई टैंकर हिंद महासागर और अरब सागर के करीब मौजूद हैं, जिन्हें किसी भी आपात स्थिति में तुरंत भारतीय बंदरगाहों पर लाया जा सकता है. 


भारत पहले से ही अपनी जरूरत का 35 प्रतिशत तेल रूस से ले रहा है, जो डिस्काउंट और कम समय की वजह से एक सुरक्षित विकल्प साबित हुआ है. जानकारों का कहना है कि हालांकि अमेरिका की सैन्य उपस्थिति और खाड़ी देशों की आर्थिक निर्भरता को देखते हुए हॉर्मुज जलडमरूमध्य की पूर्ण नाकेबंदी लंबे समय तक चलना मुश्किल है, लेकिन भारत को लंबी अवधि तक ऊंचे दामों की आर्थिक मार झेलने के लिए तैयार रहना होगा.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP