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ईरान ने वैश्विक व्यापार मार्गों को बनाया नया हथियार

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04 अग. 2026, 07:31 AM 2 मिनट में पढ़ें 2

मोजतबा खामेनेई
मोजतबा खामेनेई

नई दिल्ली । डेस्क: तेहरान और वाशिंगटन के बीच जारी तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है, जहां ईरान एक रणनीतिक 'एंड्यूरेंस गेम' के जरिए अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बढ़ा रहा है. खाड़ी क्षेत्र के अधिकारियों और सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, ईरान का लक्ष्य सीधी सैन्य जीत हासिल करना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय व्यापार मार्गों, नौवहन लेन और ऊर्जा बुनियादी ढांचों को रणनीतिक दबाव बिंदु में बदलना है. 


तेहरान इस 'कैलिब्रेटेड एस्केलेशन' (नपी-तुली आक्रामकता) के माध्यम से संघर्ष को इस हद तक व्यापक बनाना चाहता है कि अमेरिका के लिए इस संकट को नियंत्रित करना, ईरान की मांगों को मानने की तुलना में अधिक खर्चीला साबित होने लगे.


ईरान मुख्य रूप से विश्व प्रसिद्ध 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' पर अपना प्रशासनिक नियंत्रण और वाणिज्यिक जहाजों पर सेवा शुल्क वसूलने का अधिकार चाहता है, जिसे वाशिंगटन ने सिरे से खारिज करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग बनाए रखने पर जोर दिया है. 


हॉर्मुज के अलावा अब लाल सागर और सऊदी ऊर्जा संपत्तियों पर मंडराते खतरों से यह साफ है कि ईरान वैश्विक वाणिज्य की सुरक्षा लागत को लगातार बढ़ाकर वाशिंगटन के धैर्य की परीक्षा ले रहा है. 

वाशिंगटन इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का मुख्य लाभ अमेरिकी या इजरायली सेना को हराने में नहीं, बल्कि क्षेत्रीय देशों और वैश्विक अर्थव्यवस्था को आर्थिक चोट पहुंचाने की उसकी क्षमता में निहित है. 


तेहरान का आकलन है कि रियायतें देने से अमेरिका और दबाव बनाता है, इसलिए बातचीत की मेज पर अपनी शर्तें तय करने के लिए सैन्य व आर्थिक जोखिमों को बढ़ाना ही एकमात्र जरिया है. दूसरी ओर, खाड़ी देश और पश्चिमी शक्तियां अब सीधे टकराव के बजाय जहाजों की सुरक्षा के लिए रक्षात्मक समुद्री गठबंधन बनाने पर मजबूर हो रही हैं, जिसे तेहरान अपनी शुरुआती सफलता के रूप में देख रहा है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP