IPS डांगी मामला: HC का गृह सचिव को नोटिस, महिला IAS से जांच की मांग
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ में निलंबित आईपीएस अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ यौन उत्पीड़न और कथित अवैध संपत्ति से जुड़े मामले में बिलासपुर उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है. न्यायमूर्ति एके प्रसाद की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य के गृह सचिव समेत अन्य संबंधित पक्षों को जल्द से जल्द अपना जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है.
अदालत अब अगस्त के अंतिम सप्ताह में इस याचिका पर अगली सुनवाई करेगी.
यह याचिका पीड़िता की ओर से उनके अधिवक्ता अभिषेक पांडेय के माध्यम से दाखिल की गई है. पीड़िता, जो पेशागत रूप से योग प्रशिक्षक हैं, का आरोप है कि ऑनलाइन योग कक्षाओं के दौरान तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) रतनलाल डांगी से उनकी पहचान हुई थी.
आरोप के मुताबिक, बाद में अधिकारी ने वीडियो कॉल पर अनुचित आचरण करना शुरू कर दिया और विरोध करने पर पीड़िता तथा उनके पुलिस विभाग में कार्यरत पति को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियाँ दीं. याचिका में अधिकारी पर लगे आरोपों के आधार पर उनकी सेवा से बर्खास्तगी और संपत्ति की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने वर्तमान जांच प्रक्रिया पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए जांच टीम में शामिल अधिकारियों को हटाने की मांग की. अदालत को अवगत कराया गया कि जांच का जिम्मा संभाल रहे अधिकारियों में से एक आरोपी डांगी के समकक्ष रैंक के थे, जबकि दूसरी अधिकारी उनसे कनिष्ठ (जूनियर) थीं.
इसके अतिरिक्त, एक जांच अधिकारी पर अन्य आपराधिक मामले भी लंबित हैं. याचिकाकर्ता ने पूर्व में केंद्रीय और राज्य के संबंधित प्रशासनिक विभागों से इन अधिकारियों को बदलने का अनुरोध किया था, किंतु कोई कार्रवाई न होने पर उन्हें उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा.
पीड़िता पक्ष का तर्क है कि पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान पुलिस जांच अधिकारियों को हटाकर इस संवेदनशील मामले की कमान किसी वरिष्ठ महिला आईएएस अधिकारी को सौंपी जानी चाहिए.
इसके साथ ही, याचिका में इस बात को भी रेखांकित किया गया है कि आईपीएस रतनलाल डांगी के निलंबन को 90 दिनों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक उन्हें आधिकारिक आरोप पत्र (चार्जशीट) जारी नहीं किया गया है, जो प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है.