हूती विद्रोहियों से भारत के इंटरनेट को खतरा
नई दिल्ली । डेस्क: भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिये लाल सागर का मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है. इस रास्ते से गुजरने वाली समुद्री केबल्स भारत को वैश्विक इंटरनेट से जोड़ती हैं. गूगल की ब्लू-रमन, एयरटेल की 2 अफ्रीका और रिलायंस जियो की इंडिया-यूरोप-एक्सप्रेस जैसी प्रमुख केबल्स मुंबई और चेन्नई के तटों तक पहुंचती हैं. ये केबल्स भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, और इनके बिना इंटरनेट सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं.
यदि हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में भारत के इंटरनेट केबल को काट दिया तो पूरे भारत में संचार व्यवस्था ठप्प पड़ जायेगी. दूसरे देशों से संपर्क कट जायेगा. पश्चिमी देशों में स्थित गूगल, फेसबुक, वााट्सएप के सर्वर से हमारा कनेक्शन कट जायेगा. इस कारण से कई काम रुक जायेंगे.
यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में तनाव को और बढ़ा दिया है. बीते एक महीने में इन्होंने दो कमर्शियल कार्गो जहाज डुबो दिये हैं. इतना ही नहीं, ये विद्रोही केबल्स की मरम्मत के लिए आने वाले जहाजों से फिरौती वसूलने की कोशिश करते हैं.
कुछ देशों पर दबाव बनाने के लिये हूतियों ने केबल्स को नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी है. अमरीका ने इन विद्रोहियों पर हमले कर उन्हें सबक सिखाने की कोशिश की, लेकिन हूती अपनी गतिविधियों से पीछे नहीं हट रहे हैं.
लाल सागर में बढ़ते खतरे को देखते हुए गूगल, जियो और एयरटेल जैसी कंपनियों ने वैकल्पिक उपाय शुरू कर दिए हैं.
अब ये कंपनियां अतिरिक्त फाइबर केबल्स जोड़ रही हैं ताकि मुख्य केबल्स के कटने पर इंटरनेट सेवायें बाधित न हों.
लाइटस्टॉर्म ग्रुप के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर अमजित गुप्ता का कहना है कि लाल सागर में मरम्मत कार्य बेहद जोखिम भरा हो गया है.
इसीलिए कई कंपनियां अब जमीन पर केबल्स बिछाने की योजना पर विचार कर रही हैं, हालांकि यह प्रक्रिया काफी महंगी है और इससे डेटा सेंटर और क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स का खर्च बढ़ सकता है.
लाल सागर में हूती विद्रोहियों की गतिविधियों के कारण भारत की इंटरनेट सेवाओं पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है. इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाली अधिकांश इंटरनेट केबल्स अगर क्षतिग्रस्त होती हैं, तो भारत में इंटरनेट सेवायें पूरी तरह ठप हो सकती हैं. पहले अमरीका और इजरायल के लिये चुनौती बने हूती विद्रोही अब भारत की डिजिटल कनेक्टिविटी के लिये भी खतरा बन गये हैं.
कौन हैं हूती विद्रोही?
यमन के अल्पसंख्यक शिया जैदी का हथियारबंद समूह ही हूती है. इस समुदाय ने 1990 में तत्कालीन राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह के कथित भ्रष्टाचार से लड़ने के लिये इस समूह का गठन किया था. हूतियों का नाम उनके अभियान के संस्थापक हुसैन अली हूती के नाम पर पड़ा है.
हूती विद्रोही खुद को अंसार अल्लाह यानी ईश्वर के साथी भी कहते हैं. साल 2003 में अमरीका के नेतृत्व में इराक पर हुये हमले में हूती विद्रोहियों ने नारा दिया था, "ईश्वर महान है. अमरीका का खात्मा हो. यहूदियों का विनाश हो और इस्लाम की विजय हो."
हूती खुद को ईरान का सहयोगी भी बताते हैं क्योंकि उनका साझा दुश्मन सऊदी अरब है. शक जताया जाता है कि हूती विद्रोहियों को ईरान हथियार भी दे रहा है. अमरीका और सऊदी अरब ने कहा था कि ईरान ने हूती विद्रोहियों को बैलिस्टिक मिसाइलें दी हैं.
लाल सागर क्या है
लाल सागर , अफ्रीका और एशिया के बीच स्थित हिंद महासागर का एक समुद्री प्रवेश द्वार है. यह दक्षिण में बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य और अदन की खाड़ी के माध्यम से महासागर से जुड़ा है. इसके उत्तर में सिनाई प्रायद्वीप , अकाबा की खाड़ी और स्वेज की खाड़ी स्थित है जो स्वेज नहर तक जाती हैं.
लाल सागर का वैश्विक व्यापार और भू-राजनीति में बहुत महत्व है. यह हिंद महासागर और भूमध्य सागर के बीच एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जो एशिया और यूरोप के बीच व्यापार को सुगम बनाता है, और वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा इस मार्ग से होकर गुजरता है. इसके अतिरिक्त, लाल सागर सैन्य और रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह कई देशों के लिये एक प्रमुख नौसैनिक मार्ग है और इस क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है.
स्वेज नहर के माध्यम से भूमध्य सागर से जुड़े होने के कारण, यह दुनिया के सबसे अधिक यात्रा किये जाने वाले जलमार्गों में से एक है. लाल सागर की सीमा पश्चिम में मिस्र , सूडान और इरिट्रिया तथा पूर्व में सऊदी अरब और यमन से लगती है.