Indo-US व्यापार समझौता करीब: टैरिफ में भारी कटौती की संभावना
नई दिल्ली । डेस्क: भारत और अमेरिका के बीच एक बड़े व्यापार समझौते पर बातचीत अंतिम और उन्नत चरण में है, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को एक नई दिशा मिल सकती है. मिंट (Mint) की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस संभावित समझौते से भारतीय निर्यात पर लगने वाले टैरिफ (Tariff) में भारी कमी आ सकती है, जो वर्तमान 50% से घटकर 15-16% तक हो सकती है.
इससे पहले, मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने भी टैरिफ विवाद के जल्द सुलझने की उम्मीद जताई थी. उन्होंने संकेत दिया था कि अमेरिका द्वारा लगाए गए 25% के अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क (Penal Levies) को हटा लिया जाएगा और पारस्परिक शुल्क (Reciprocal Tariff) भी 25% से घटकर 10-15% के बीच आ सकता है.
रूसी तेल और अमेरिकी कृषि पर सहमति
समझौते का एक प्रमुख बिंदु भारत का रूसी तेल आयात है. मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, भारत चरणबद्ध तरीके से रूसी कच्चे तेल के आयात को कम करने पर सहमत हो सकता है. वर्तमान में, भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 34% रूस से आयात करता है.
इसके बदले में, अमेरिका से ऊर्जा व्यापार में रियायतें मिलने की उम्मीद है. रिपोर्ट बताती है कि भारत की सरकारी तेल कंपनियों को अमेरिका की ओर कच्चे तेल के स्रोत को विविधतापूर्ण बनाने की सलाह दी जा सकती है. यह तब हो रहा है जब रूसी कच्चे तेल पर छूट (Discount) काफी कम हो गई है, जिससे मध्य पूर्वी और अमेरिकी क्रूड अधिक प्रतिस्पर्धी बन गए हैं.
कृषि के मोर्चे पर, भारत अपने बाजारों में गैर-जीएम (Non-GM) अमेरिकी मक्का और सोयाबीन के आयात की अनुमति बढ़ा सकता है. यह कदम तब आया है जब चीन द्वारा आयात में कटौती के कारण अमेरिका नए खरीदारों की तलाश कर रहा है.
व्यापारिक महत्व और घोषणा की संभावना
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा माल आयातक (Merchandise Importer) है, और भारत आमतौर पर अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) रखता है. वित्त वर्ष 2025 में भारत का अमेरिका को निर्यात $86.51 बिलियन रहा था. CEA नागेश्वरन के अनुसार, यदि टैरिफ जारी रहे तो अगले साल निर्यात की मात्रा में 30% तक की कमी आ सकती है.
यह व्यापार समझौता आसियान शिखर सम्मेलन (ASEAN Summit) में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच घोषित किया जा सकता है, हालांकि दोनों नेताओं की भागीदारी अभी तक स्पष्ट नहीं है. भारत की ओर से वाणिज्य मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का कार्यालय इस समझौते पर बातचीत कर रहा है.
यह समझौता दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने और दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है.