Indo-EU FTA से नेपाल के परिधान उद्योग पर संकट
काठमांडू । डेस्क: भारत और यूरोपीय संघ के बीच हाल ही में संपन्न हुए 'ऐतिहासिक' मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने नेपाल के निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है. नेपाल परिधान संघ के अनुसार, यह समझौता विशेष रूप से नेपाल के रेडी-मेड गारमेंट क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती पेश कर सकता है, क्योंकि देश इस वर्ष नवंबर में 'अल्पविकसित देश' (LDC) की श्रेणी से बाहर निकलने की तैयारी कर रहा है.
काठमांडू में साउथ एशिया वॉच ऑन ट्रेड, इकोनॉमिक्स एंड एनवायरनमेंट (SAWTEE) द्वारा आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि भारत को मिलने वाली तरजीही बाजार पहुंच से यूरोपीय बाजारों में नेपाली उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो जाएगी.
वर्तमान में नेपाल सालाना लगभग 6 अरब रुपये के परिधान यूरोप को निर्यात करता है, जिसमें अब गिरावट की आशंका है.
भारत-ईयू समझौते के तहत कपड़ा, चमड़ा और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में शुल्क कम होने से भारतीय सामान सस्ता हो जाएगा.
नेपाल के उद्योग जगत के नेताओं का मानना है कि नेपाल को अब यूरोपीय संघ से एलडीसी ग्रेजुएशन के बाद भी व्यापारिक सुविधाएं जारी रखने का अनुरोध करना चाहिए.
साथ ही, नेपाल को वैकल्पिक बाजारों की तलाश और आर्थिक कूटनीति को मजबूत करने की आवश्यकता है.
विशेषज्ञों ने नेपाल सरकार को सुझाव दिया है कि वह बांस और केले जैसे पौधों पर आधारित फाइबर के प्रसंस्करण के लिए भारत के साथ सहयोग बढ़ाए और व्यापार वार्ताओं के लिए एक स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) विकसित करे ताकि भविष्य की चुनौतियों से निपटा जा सके.