ट्रंप के टैरिफ से भारतीय फार्मा शेयरों में गिरावट,दावा- जेनेरिक दवाएं सुरक्षित
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ब्रांडेड दवाओं पर 100 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा के बाद शुक्रवार को भारतीय फार्मा कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई. हालांकि, उद्योग संगठनों ने इस कदम के प्रभाव को कम बताते हुए कहा कि भारत की जेनेरिक दवाएं, जो अमेरिका की लगभग आधी आपूर्ति का हिस्सा हैं, इस टैरिफ से मुक्त हैं.
बीएसई हेल्थकेयर इंडेक्स 2.14 प्रतिशत गिरकर 43,046.69 पर बंद हुआ. वॉकहार्ट के शेयर 9.4 प्रतिशत, इंडोको रेमेडीज 5.35 प्रतिशत, जायडस लाइफसाइंसेज 4.21 प्रतिशत, ग्लेनमार्क फार्मा 2.99 प्रतिशत और सन फार्मा 2.55 प्रतिशत लुढ़के. ल्यूपिन में 2.07 प्रतिशत, डॉ. रेड्डीज में 1.73 प्रतिशत और औरोबिंदो फार्मा में 0.57 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई.
सेंसेक्स 733 अंक यानी 0.9 प्रतिशत गिरकर 80,426.46 पर और निफ्टी 236 अंक यानी 0.95 प्रतिशत गिरकर 24,654.70 पर बंद हुआ.
ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, "1 अक्टूबर 2025 से, हम किसी भी ब्रांडेड या पेटेंटेड दवा पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाएंगे, जब तक कि कंपनी अमेरिका में अपना फार्मास्यूटिकल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट न बना रही हो. अगर निर्माण शुरू हो चुका है, तो कोई टैरिफ नहीं लगेगा."
इस घोषणा ने निवेशकों में हड़कंप मचा दिया, लेकिन भारतीय फार्मा संगठनों ने इसके प्रभाव को कम बताया. इंडियन फार्मास्यूटिकल अलायंस के महासचिव सुदर्शन जैन ने कहा, "यह टैरिफ जेनेरिक दवाओं पर लागू नहीं है." आईपीए में सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज, ल्यूपिन और जायडस जैसी 23 प्रमुख कंपनियां शामिल हैं.
फार्मेक्सिल के चेयरमैन नमित जोशी ने कहा कि भारत अमेरिका की लगभग 47 प्रतिशत फार्मास्यूटिकल जरूरतों को पूरा करता है, जो ज्यादातर सस्ती जेनेरिक दवाओं के जरिए होती हैं. उन्होंने बताया कि अधिकांश बड़ी भारतीय कंपनियों के पास पहले से ही अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग या रीपैकेजिंग इकाइयां हैं, इसलिए तत्काल प्रभाव की संभावना कम है.
विश्लेषकों ने चेतावनी दी कि भविष्य में अगर अमेरिका जेनेरिक दवाओं पर ध्यान देता है, तो जोखिम बढ़ सकता है. जियोजित इनवेस्टमेंट्स के डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा, "फिलहाल भारत सुरक्षित है, लेकिन शायद अगला निशाना जेनेरिक दवाएं हो सकती हैं."
उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की आपूर्ति श्रृंखला को बदलना आसान नहीं होगा. वेल्थमिल्स के क्रांति बाथिनी ने कहा, "भारतीय फार्मा कंपनियां वैश्विक मानकों और यूएस एफडीए-अनुमोदित संयंत्रों के साथ काम करती हैं. इस आपूर्ति श्रृंखला को बदलना एक बड़ी चुनौती होगी."
एमक्योर फार्मास्यूटिकल्स, जिसका अमेरिकी बाजार में सीमित दखल है, ने कहा कि इस टैरिफ का उसके संचालन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
उद्योग नेताओं ने कहा कि भारत को लागत-कुशल बल्क ड्रग्स और सक्रिय फार्मास्यूटिकल सामग्री (एपीआई) में अपनी स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ जटिल जेनेरिक, बायोसिमिलर और CAR-T जैसी उन्नत चिकित्सा पद्धतियों में निवेश करना होगा.
जोशी ने कहा, "जेनेरिक दवाएं प्रासंगिक रहेंगी, लेकिन इनका बाजार परिपक्व हो रहा है. लागत और उभरती श्रेणियों में क्षमता बढ़ाना अगले चरण की वृद्धि को आकार देगा."
फिलहाल, बाजार सतर्क बना हुआ है. निवेशक डर रहे हैं कि ट्रंप का यह कदम फार्मास्यूटिकल आयात पर सख्त रुख की शुरुआत हो सकता है.