अर्थव्यवस्था में मंदी के संकेत- जयराम रमेश
नई दिल्ली । डेस्क: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक हालिया रिपोर्ट के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई है. इस रिपोर्ट में अर्थव्यवस्था में मंदी के कई संकेतों को रेखांकित किया गया है, जो देश के आर्थिक भविष्य को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, कई प्रमुख आर्थिक संकेतक नीचे की ओर जा रहे हैं. बैंक ऋण वृद्धि दर 16 प्रतिशत से घटकर 9 प्रतिशत पर आ गई है, जीएसटी संग्रह की वृद्धि 11 प्रतिशत से गिरकर 6.2 प्रतिशत हो गई है, और निर्यात वृद्धि भी केवल 6 प्रतिशत पर सिमट गई है.
इसके अलावा, आठ प्रमुख क्षेत्रों की वृद्धि दर 8 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत पर आ गई है, जबकि डीजल खपत में केवल 1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. मध्यम और भारी वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में भी 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि उपभोग व्यय पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) से अधिक तेजी से बढ़ रहा है, जो महामारी के दौरान देखी गई प्रवृत्ति की तरह है. यह दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिये चिंताजनक हो सकता है. इसके साथ ही, वैश्विक व्यापारिक तनाव और वित्तीय बाजारों में अस्थिरता भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए बड़े जोखिम बन रहे हैं.
हालांकि नुवामा की नवीनतम रिपोर्ट में ग्रामीण मुद्रास्फीति का विशेष रूप से उल्लेख नहीं किया गया, लेकिन अन्य विश्लेषणों में यह बात सामने आई है कि दिसंबर 2024 में ग्रामीण क्षेत्रों में मुद्रास्फीति 5.8 प्रतिशत रही, जो शहरी क्षेत्रों की 4.6 प्रतिशत की दर से काफी अधिक है.
खाद्य और ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में मंदी का असर भारत के निर्यात मांग और विदेशी निवेश पर पड़ सकता है. इसके अलावा, बढ़ती आबादी के लिए पर्याप्त रोजगार सृजन और बुनियादी ढांचे के विकास में असमान प्रगति भी अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतियां पेश कर रही हैं.
आर्थिक विकास को पर्यावरणीय स्थिरता के साथ संतुलित करना भी एक जटिल कार्य है.
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि अर्थव्यवस्था को "विशाल प्रोत्साहन" की जरूरत है. उन्होंने जीएसटी में व्यापक सुधार, "कर आतंकवाद" को समाप्त करने और एक या दो बड़े व्यापारिक समूहों के प्रति पक्षपात खत्म करने की वकालत की.