INDIA-UK FTA: भारतीय जेनेरिक दवाओं को बढ़ावा
नई दिल्ली । डेस्क: भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच 24 जुलाई 2025 को हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) भारतीय जेनेरिक दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की यूके बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने वाला साबित होगा. व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि इस समझौते के तहत जेनेरिक दवाओं पर शून्य टैरिफ प्रावधान भारतीय फार्मा कंपनियों के लिये गेम-चेंजर होगा.
यूके भारत का यूरोप में सबसे बड़ा फार्मास्युटिकल निर्यात गंतव्य है. भारत वैश्विक स्तर पर 23.31 बिलियन अमरीकी डॉलर का फार्मा निर्यात करता है, जबकि यूके लगभग 30 बिलियन अमरीकी डॉलर का आयात करता है. हालांकि, भारतीय फार्मा का यूके में योगदान केवल 914 मिलियन अमरीकी डॉलर है, जो इस क्षेत्र में भारी वृद्धि की संभावना को दर्शाता है.
फार्मास्युटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (फार्मेक्सिल) के अध्यक्ष नमित जोशी ने इस समझौते को ऐतिहासिक करार देते हुये कहा, "भारत-यूके एफटीए फार्मास्युटिकल क्षेत्र में आर्थिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण कदम है. यह समझौता आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करेगा, सस्ती दवाओं तक पहुंच बढ़ायेगा और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को प्रोत्साहन देगा. इसके अलावा, बल्क ड्रग आयात, सीडीएमओ और संयुक्त अनुसंधान में सहयोग के नये अवसर खुलेंगे, जिससे भारत की प्रतिस्पर्धी ताकत बढ़ेगी."
इसके साथ ही, चिकित्सा उपकरणों जैसे सर्जिकल उपकरण, डायग्नोस्टिक उपकरण, ईसीजी मशीनें और एक्स-रे सिस्टम पर भी कोई शुल्क नहीं लगेगा, जिससे भारतीय मेड-टेक कंपनियों की लागत कम होगी और उनके उत्पाद यूके बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे.
ओम्नीएक्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजीज के कार्यकारी अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक संजय मारीवाला ने इस समझौते के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, "यह समझौता स्वास्थ्य क्षेत्र के लिये एक स्वागत योग्य कदम है. पिछले साल हमारे यूके निर्यात में 12.6% की वृद्धि हुई थी, और यह समझौता उस वृद्धि को और गति देगा. नियामक बाधाओं में कमी से भारतीय स्वास्थ्य कंपनियों को यूके में काम करना आसान होगा, जिससे सस्ती सेवायें और दोनों देशों के बीच बेहतर सहयोग संभव होगा."
मारीवाला ने यह भी जोड़ा, "हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि एफटीए तभी प्रभावी होते हैं जब घरेलू व्यवसाय मजबूत हों. जैसे-जैसे भारत अन्य देशों के साथ और एफटीए पर हस्ताक्षर करता है, हमें अपने स्थानीय उद्यमियों और एमएसएमई को वित्त, बुनियादी ढांचे और नीतिगत स्पष्टता के साथ समर्थन देना होगा."
रसायन और संबद्ध उत्पादों में भारत का वैश्विक निर्यात 40.52 बिलियन अमरीकी डॉलर है, जबकि यूके 35.11 बिलियन अमरीकी डॉलर का आयात करता है. लेकिन भारत इस बाजार में केवल 843 मिलियन अमरीकी डॉलर का हिस्सा लेता है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस समझौते से भारत के रसायन निर्यात में 30-40% की वृद्धि होगी, जो 2025-26 में 650-750 मिलियन अमरीकी डॉलर तक पहुंच सकता है.