भारतीय रूसी सेना में भर्ती के प्रस्तावों से रहें दूर- विदेश मंत्रालय
नई दिल्ली । डेस्क: विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में भर्ती के प्रस्तावों से दूर रहने की चेतावनी दोहराई है. यह चेतावनी यूक्रेन के युद्धक्षेत्र में कम से कम 15 भारतीय नागरिकों के फंसे होने की खबरों के बाद आई है, जिन्हें कथित तौर पर रूसी सैनिकों के साथ लड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है.
मंत्रालय ने कहा कि भारत ने इस मुद्दे को मास्को और दिल्ली में रूसी अधिकारियों के साथ उठाया है और पहले से भर्ती हुए भारतीयों की रिहाई की मांग की है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "हमें हाल ही में भारतीय नागरिकों को रूसी सेना में भर्ती किए जाने की खबरें मिली हैं. सरकार ने पिछले एक साल में कई बार इस तरह के कदमों से जुड़े जोखिमों और खतरों को रेखांकित किया है और भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है. हमने दिल्ली और मास्को में रूसी अधिकारियों के साथ इस मामले को उठाया है, इस प्रथा को समाप्त करने और हमारे नागरिकों को रिहा करने की मांग की है."
उन्होंने आगे कहा, "हम एक बार फिर सभी भारतीय नागरिकों से आग्रह करते हैं कि वे रूसी सेना में शामिल होने के किसी भी प्रस्ताव से बचें, क्योंकि यह अत्यंत खतरनाक है."
गौरतलब है कि यह चेतावनी द हिंदू की एक रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें कहा गया है कि यूक्रेन में कम से कम 15 भारतीय नागरिक युद्धक्षेत्र में फंसे हैं और उन्हें रूसी पक्ष के लिए लड़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है.
डोनेट्स्क क्षेत्र में दो लोगों ने अखबार को बताया कि उन्हें निर्माण कार्य के वादे के साथ रूस लाया गया था, लेकिन उन्हें युद्ध के मोर्चे पर तैनात कर दिया गया. उन्होंने दावा किया कि कम से कम 13 अन्य भारतीय भी ऐसी ही स्थिति में हैं.
यह पहली बार नहीं है जब भारतीय नागरिकों को इस संघर्ष में शामिल किया गया है.
24 जुलाई, 2025 को विदेश मंत्रालय ने राज्यसभा को सूचित किया था कि 127 भारतीय नागरिक रूसी सशस्त्र बलों का हिस्सा थे. इनमें से 98 को दोनों सरकारों के बीच निरंतर बातचीत के बाद रिहा कर दिया गया था. हालांकि, 13 भारतीय अभी भी वहां हैं, जिनमें से 12 को रूसी अधिकारियों ने लापता बताया है.
इस तरह की खबरों ने युद्धग्रस्त क्षेत्रों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं. सरकार ने जोर देकर कहा है कि विदेशी सेनाओं में भ्रामक भर्ती भारतीयों के जीवन और सुरक्षा के लिए गंभीर जोखिम पैदा करती है.
(फोटो- प्रतीकात्मक)