तारिक रहमान की वापसी से भारत को रिश्तों में सुधार की उम्मीद
नई दिल्ली । डेस्क: बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बीच भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों में एक नई सुगबुगाहट देखी जा रही है. मंगलवार 17 फरवरी, 2026 को बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने जा रहे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के अध्यक्ष तारिक रहमान के '31-सूत्रीय विकास एजेंडे' ने दिल्ली में कूटनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है.
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, भारत रहमान के अभियान पर बारीकी से नज़र रख रहा है, जिसमें डिजिटल डोमेन और बुनियादी ढांचे के विकास पर जोर दिया गया है.
विशेष रूप से यह देखा गया कि डेढ़ दशक के निर्वासन के बाद लौटे रहमान ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान पारंपरिक 'भारत-विरोधी कार्ड' खेलने से परहेज किया, जो पिछले 17 महीनों से ठप पड़े रिश्तों को सामान्य करने का एक बड़ा अवसर हो सकता है.
तनावपूर्ण दौर के बाद अब दोनों देशों के सामने गंगा जल संधि के नवीनीकरण और कनेक्टिविटी परियोजनाओं को बहाल करने जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं. जहां एक ओर तारिक रहमान ने 'इंद्रधनुषी राष्ट्र' (Rainbow Nation) और आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की बात कही है, वहीं भारत की प्राथमिकता अपने राजनयिक मिशनों और वीज़ा केंद्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जो पिछले महीनों में विरोध प्रदर्शनों के कारण प्रभावित हुए थे.
हालांकि, भारत में शेख हसीना की मौजूदगी और उनके सहयोगियों की राजनीतिक गतिविधियां अभी भी एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई हैं, लेकिन रहमान द्वारा 'प्रतिशोध की राजनीति' के बजाय न्यायिक प्रक्रिया पर जोर देने से कूटनीतिक रिश्तों में स्थिरता की संभावना बढ़ी है.
अब सबकी नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश अपने राष्ट्रीय हितों को साधते हुए आपसी सहयोग के एक नए अध्याय की शुरुआत कर पाएंगे.