मेडिकल डिवाइस की कीमतों में भारी खेल: ₹3 की सुई ₹30 में
नई दिल्ली । डेस्क: भारत में चिकित्सा उपकरणों की कीमतों में भारी विसंगति का खुलासा हुआ है, जहाँ मरीज फैक्टरी लागत से 25 गुना अधिक कीमत चुकाने को मजबूर हैं. घरेलू उपकरण निर्माताओं के संगठन 'एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइसेस' (AIMED) ने केंद्र सरकार को सौंपे दस्तावेजों में बताया है कि अस्पताल और रिटेलर्स अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए निर्माताओं पर अधिकतम खुदरा मूल्य बढ़ाने का दबाव डालते हैं.
आंकड़ों के मुताबिक, जिस सीरिंज की मैन्युफैक्चरिंग लागत ₹3 है, उसे ₹12 में बेचा जा सकता है, लेकिन उस पर ₹30 का टैग लगाया जाता है. इसी तरह, ₹25,000 में आयात होने वाले पेसमेकर की कीमत ₹2 लाख और ₹4 लाख के हार्ट वाल्व की MRP ₹26 लाख तक पहुंच जाती है.
AIMED के अनुसार, भारतीय चिकित्सा उपकरण बाजार का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा आयातित सामानों का है, जिसका मूल्य करीब ₹1.3 लाख करोड़ है.
संगठन का कहना है कि यह बाजार खुली प्रतिस्पर्धा के बजाय अनुचित मुनाफे के आधार पर चल रहा है, जहाँ अस्पताल उन उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं जिनकी MRP लागत से 10 से 20 गुना ज्यादा होती है.
इस स्थिति को सुधारने के लिए उद्योग जगत ने सरकार से 'ट्रेड मार्जिन कैप' यानी मुनाफे की सीमा तय करने की मांग की है. निर्माताओं ने प्रस्ताव दिया है कि ₹1 लाख से महंगे उपकरणों पर 50%, ₹1,000 से ₹1 लाख के बीच 66% और ₹1,000 से कम के उपकरणों पर अधिकतम 75% का मार्जिन तय किया जाए ताकि मरीजों को सस्ती दरों पर इलाज मिल सके और बाजार में पारदर्शिता आए.