भारत ने ईजाद की नई दवा नफीथ्रोमाइसिन, दावा- 3 दिन में ठीक करेगी निमोनिया
रायपुर । सीजीखबर डेस्क: भारतीय दवा कंपनी वॉकहार्ट ने चिकित्सा जगत में एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए देश की पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक दवा 'नफीथ्रोमाइसिन' तैयार की है. इस दवा को लेकर दावा किया जा रहा है कि यह निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी को महज तीन दिन के कोर्स में ठीक करने की ताकत रखती है.
सरकार की संस्था नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) ने 24 मार्च 2026 को हुई एक अहम बैठक में इस दवा को अगले पांच वर्षों के लिए मूल्य नियंत्रण नियमों (DPCO 2013) से छूट देने का फैसला किया है. इसका मतलब है कि कंपनी को इस नई खोज को बढ़ावा देने के लिए अपनी दवा की कीमत तय करने में शुरुआती राहत मिलेगी.
'मिकनाफ़' ब्रांड नाम से बाजार में उतरने वाली यह दवा विशेष रूप से उन बैक्टीरिया से लड़ने के लिए बनाई गई है, जिन पर पुरानी दवाएं बेअसर हो चुकी हैं.
यह नई एंटीबायोटिक मौजूदा प्रचलित दवाओं जैसे 'एज़िथ्रोमाइसिन' की तुलना में 10 गुना ज्यादा प्रभावी है. जहां आम तौर पर निमोनिया के इलाज में लंबा समय लगता है, वहीं नफीथ्रोमाइसिन का तीन दिन का छोटा कोर्स न केवल रिकवरी को तेज करेगा, बल्कि मरीजों के लिए इलाज को भी आसान बना देगा.
यह दवा उन बच्चों और बुजुर्गों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकती है, जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है.
इस दवा के विकास में लगभग 500 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है और इसे सरकार की 'बाइरैक' संस्था से भी सहयोग मिला है.
जानकारों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर पिछले 30 वर्षों में इस श्रेणी की यह पहली नई एंटीबायोटिक है, जिसे भारत में ही विकसित और परीक्षण किया गया है. पेटेंट कार्यालय और ड्रग रेगुलेटर से हरी झंडी मिलने के बाद अब वॉकहार्ट जल्द ही इसे व्यवसायिक रूप से बाजार में पेश करेगी, जिससे देश में दवा अनुसंधान के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू होगा.
गौरतलब है कि निमोनिया फेफड़ों में होने वाला एक गंभीर संक्रमण है, जिसमें फेफड़ों की छोटी वायु थैलियों (एल्विओली) में सूजन आ जाती है और उनमें तरल पदार्थ या मवाद भर जाता है. यह संक्रमण मुख्य रूप से बैक्टीरिया, वायरस या फंगस की वजह से होता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है और शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है.
निमोनिया होने पर मरीज को तेज बुखार, कंपकंपी के साथ ठंड लगना, सीने में दर्द और बलगम वाली खांसी जैसे लक्षण महसूस होते हैं. कई बार संक्रमण गहरा होने पर सांसें तेज चलने लगती हैं और मरीज को बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होती है.
यह बीमारी किसी को भी हो सकती है, लेकिन छोटे बच्चों, 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों और उन लोगों के लिए यह अधिक खतरनाक होती है जिनका इम्यून सिस्टम यानी रोगों से लड़ने की शक्ति कमज़ोर है. निमोनिया का संक्रमण हवा में मौजूद बूंदों के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है, जैसे कि किसी संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से.
इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है या उसे पहले से अस्थमा या डायबिटीज जैसी बीमारियां हैं, तो उसे निमोनिया होने का खतरा काफी बढ़ जाता है. समय पर सही एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवाओं और उचित देखभाल से इसका इलाज संभव है, लेकिन लापरवाही बरतने पर यह जानलेवा भी हो सकता है.