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चीन पर निर्भरता घटाने के लिए भारत और ब्राजील आए साथ

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21 फ़र. 2026, 06:53 PM 2 मिनट में पढ़ें 1

मोदी-लूला
मोदी-लूला

नई दिल्ली । डेस्क: नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लुला डा सिल्वा ने रणनीतिक सहयोग को मजबूत करते हुए एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (Rare Earths) के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना है, ताकि चीन के वैश्विक दबदबे को चुनौती दी जा सके और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक लचीला बनाया जा सके. 


प्रधानमंत्री मोदी ने इसे "लचीली सप्लाई चेन बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम" करार दिया है, क्योंकि भारत अपनी औद्योगिक और तकनीकी जरूरतों के लिए नए और भरोसेमंद आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रहा है.


ब्राजील, जो चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महत्वपूर्ण खनिज भंडार वाला देश है, इलेक्ट्रिक वाहनों, सोलर पैनल और रक्षा उपकरणों जैसे जेट इंजन और मिसाइलों के निर्माण में भारत का अहम साझेदार बन सकता है. 


राष्ट्रपति लुला ने इस समझौते को अग्रणी बताते हुए कहा कि अक्षय ऊर्जा और खनिजों में निवेश उनके द्विपक्षीय संबंधों के केंद्र में है. 


वर्तमान में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध पहले से ही मजबूत हैं. साल 2024 के आंकड़ों के अनुसार भारत से ब्राजील को 7.23 अरब डॉलर का निर्यात हुआ, जबकि ब्राजील से भारत को 5.38 अरब डॉलर का निर्यात प्राप्त हुआ. 


इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने ब्राजील को लैटिन अमेरिका में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बताते हुए अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर के पार ले जाने का लक्ष्य रखा है. 


विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लोबल साउथ के इन दो बड़े देशों के बीच यह गठबंधन न केवल संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार के नए नियम तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP