ट्रंप के टैरिफ का असर: जर्मनी ने US से मुंह मोड़ा, चीन में निवेश बढ़ाया
बर्लिन । डेस्क: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की आक्रामक व्यापारिक नीतियों और यूरोपीय संघ (EU) पर लगाए गए भारी टैरिफ ने वैश्विक व्यापार की दिशा बदल दी है. हाल ही में आए आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में जर्मन कंपनियों ने चीन में रिकॉर्ड निवेश किया है.
रॉयटर्स के लिए आईडब्ल्यू जर्मन इकोनॉमिक इंस्टीट्यूट द्वारा संकलित आंकड़ों से पता चला है कि जनवरी से नवंबर 2025 के बीच चीन में जर्मन निवेश बढ़कर 7 बिलियन यूरो (लगभग 8 बिलियन डॉलर) से अधिक हो गया है. यह 2024 के मुकाबले 55.5% की भारी बढ़ोतरी है.
दिलचस्प बात यह है कि जहां एक ओर जर्मन कंपनियों ने चीन में अपनी पैठ मजबूत की है, वहीं ट्रंप के कार्यकाल के पहले साल में अमेरिका में जर्मन निवेश लगभग आधा रह गया है.
चीन एक बार फिर जर्मनी का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बनकर उभरा है, जबकि 2024 में यह खिताब अमेरिका के पास था.
जानकारों का मानना है कि 'जियोपॉलिटिकल' तनाव और टैरिफ के डर से कंपनियां अब 'चीन में चीन के लिए' उत्पादन की रणनीति अपना रही हैं. इसका मतलब है कि वे स्थानीय स्तर पर सप्लाई चेन को मजबूत कर रही हैं ताकि वैश्विक व्यापार युद्ध की स्थिति में उन पर कम से कम असर पड़े.
जर्मनी की दिग्गज कंपनियां जैसे फॉक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और बीएएसएफ अब चीनी बाजार को स्वतंत्र रूप से देख रही हैं. फॉक्सवैगन के अनुसार, चीन में विकसित तकनीक का इस्तेमाल अब दक्षिण पूर्व एशिया और दक्षिण अमेरिका जैसे अन्य क्षेत्रों में भी किया जा रहा है, जो उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाता है.
वहीं, जर्मनी की अर्थव्यवस्था मंत्री कैथरीना रीचे ने भी संकेत दिया है कि स्थापित संबंधों में आती कमजोरी के बीच अब नए गठबंधनों की तलाश जरूरी हो गई है. केवल जर्मनी ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन, कनाडा और दक्षिण अमेरिका जैसे देश भी ट्रंप की नीतियों के बीच चीन के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को विस्तार देने में जुटे हैं.