जशपुर में रेत का काला खेल: शंख नदी का सीना चीर रहे माफिया
जशपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ और झारखंड की सरहद पर स्थित शंख नदी इन दिनों रेत माफियाओं की अवैध गतिविधियों का मुख्य केंद्र बन चुकी है. लोदाम थाना क्षेत्र के ग्राम पुत्रीचौरा में बड़े पैमाने पर नदी से बालू निकालकर कटनी-गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग से लेकर स्थानीय गौठान की जमीनों तक इसका अवैध भंडारण किया जा रहा है.
हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे अवैध कारोबार को राजनीतिक रसूख और प्रशासनिक अनदेखी का पूरा सह मिला हुआ है, जिससे इलाके में कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं.
इस अवैध धंधे में सिर्फ पर्यावरण का दोहन ही नहीं हो रहा, बल्कि स्थानीय ट्रैक्टर चालकों से रंगदारी भी वसूली जा रही है. हर ट्रिप के एवज में चालकों से जबरन 100 रुपये वसूले जा रहे हैं, जिससे यह महीनावार अवैध उगाही करीब 30 से 40 हजार रुपये तक पहुंच जाती है.
ग्रामीणों के अनुसार, कुछ संदिग्ध तत्व इस वसूली को बेखौफ अंजाम दे रहे हैं और जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बने बैठे हैं.
शासन के ढीले रवैये से स्थानीय स्तर पर भारी नाराजगी है. ग्राम पंचायत पुत्रीचौरा के सचिव रामचंद्र राम का कहना है कि इस अनियंत्रित और गैर-कानूनी खनन के कारण सरकार के साथ-साथ पंचायत को भी हर महीने भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है.
अगर इसी खदान को नियमों के तहत कानूनी मान्यता मिल जाती, तो इससे शासन और पंचायत दोनों की झोली में अच्छा-खासा राजस्व आता.
वहीं, ग्राम पंचायत के सरपंच अरुण लकड़ा ने पूरे मामले पर रोष व्यक्त करते हुए कहा कि शंख नदी में यह खेल पिछले कई सालों से बदस्तूर जारी है.
पंचायत ने बकायदा प्रस्ताव बनाकर प्रशासन को भेजा था ताकि नियमों के दायरे में खदान का संचालन हो सके, लेकिन शासन की उलझी नीतियों की वजह से यह फाइल अब तक अटकी हुई है. उन्होंने बताया कि पहले भी कई बार इस संबंध में शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा.
फिलहाल, ग्रामीणों में इस प्रशासनिक निष्क्रियता को लेकर गहरा असंतोष है. स्थानीय जनता ने मांग की है कि नदी से हो रहे इस अवैध दोहन, भंडारण और अवैध वसूली के पूरे गठजोड़ की उच्च स्तरीय जांच की जाए. दोषियों पर सख्त कानूनी शिकंजा कसने की जरूरत है ताकि सरकार के राजस्व की चोरी रुक सके और सीमावर्ती इलाके में कानून का राज कायम हो सके.