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US धमकियों के सामने लैटिन अमेरिका की सैन्य ताकत कितनी है?

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07 जन. 2026, 10:42 PM 2 मिनट में पढ़ें 1

US Army
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नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर बड़े सैन्य हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिए जाने के बाद पूरे लैटिन अमेरिका में हड़कंप मच गया है. इस कार्रवाई के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कोलंबिया, क्यूबा और मेक्सिको को भी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वे “अपना रवैया नहीं सुधारते” तो अमेरिका सैन्य कदम उठा सकता है. 


ट्रम्प का दावा है कि ये धमकियां ड्रग तस्करी रोकने और पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए दी जा रही हैं.


इन बयानों ने एक बार फिर लैटिन अमेरिका में अमेरिकी दखल के पुराने जख्म हरे कर दिए हैं. हालांकि जिन देशों को निशाना बनाया गया है, वे वाशिंगटन की दखलअंदाजी से दूरी बनाना चाहते हैं, लेकिन उनकी नियमित सेनाएं अमेरिका जैसी सैन्य महाशक्ति का मुकाबला करने की स्थिति में नहीं मानी जातीं.


2025 के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका दुनिया की सबसे ताकतवर सेना रखता है और उसका रक्षा बजट 895 अरब डॉलर है, जो दुनिया के अगले दस सबसे बड़े सैन्य खर्च करने वाले देशों के कुल बजट से भी अधिक है. 


ग्लोबल फायरपावर रैंकिंग में ब्राज़ील लैटिन अमेरिका की सबसे मजबूत सेना के रूप में 11वें स्थान पर है, जबकि मेक्सिको 32वें, कोलंबिया 46वें, वेनेजुएला 50वें और क्यूबा 67वें स्थान पर हैं. टैंक, लड़ाकू विमान, नौसेना और बजट जैसे लगभग सभी पारंपरिक सैन्य मानकों पर ये देश अमेरिका से काफी पीछे हैं.


हालांकि एक क्षेत्र ऐसा है जहां कुछ लैटिन अमेरिकी देशों की स्थिति अलग दिखती है वह है अर्धसैनिक (पैरामिलिट्री) बल. क्यूबा के पास दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी पैरामिलिट्री फोर्स बताई जाती है, जिसमें 11 लाख से अधिक सदस्य शामिल हैं. वेनेजुएला में ‘कोलेक्टिवोस’ जैसे सशस्त्र समूह सरकार समर्थक माने जाते हैं, जबकि कोलंबिया और मेक्सिको में सशस्त्र गिरोह और ड्रग कार्टेल व्यावहारिक रूप से अर्धसैनिक ताकत के रूप में मौजूद हैं.


इतिहास बताता है कि अमेरिका ने पिछले दो सौ वर्षों में कई बार लैटिन अमेरिका में हस्तक्षेप किया है चाहे वह ‘बनाना वॉर्स’ हों, शीत युद्ध के दौरान तख्तापलट की साजिशें हों या 1989 में पनामा पर सीधा हमला. ऐसे में ट्रम्प की नई धमकियों ने पूरे क्षेत्र में इस सवाल को फिर खड़ा कर दिया है कि क्या लैटिन अमेरिका अपनी संप्रभुता की रक्षा कर पाएगा, या एक बार फिर अमेरिकी सैन्य दबाव के दौर में प्रवेश करेगा.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP