दुनिया के प्रमुख देशों के पास कितना है आपातकालीन तेल भंडार?
नई दिल्ली । डेस्क: दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में अस्थिरता के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने सदस्य देशों को अपने आपातकालीन तेल भंडार का उपयोग करने के लिए सचेत किया है. कच्चे तेल के आयात पर निर्भर देश आपूर्ति बाधित होने के जोखिम से बचने के लिए 'स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व' बनाए रखते हैं, जो वैश्विक संकट के समय बाजार को स्थिर करने में मदद करता है.
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के नियमों के अनुसार, शुद्ध आयातक देशों को कम से कम 90 दिनों के शुद्ध आयात के बराबर भंडार रखना अनिवार्य है, जिसे सरकारी और वाणिज्यिक दोनों स्तरों पर सुरक्षित रखा जाता है.
इस समय अमेरिका के पास दुनिया का सबसे बड़ा आपातकालीन भंडार है, जिसमें रणनीतिक रूप से 415.4 मिलियन बैरल और निजी क्षेत्र में 439.3 मिलियन बैरल तेल मौजूद है.
चीन ने भी विशाल भंडार बना रखा है, जहां जनवरी तक लगभग 1.2 बिलियन बैरल कच्चा तेल जमा होने का अनुमान है, जो उसकी 3-4 महीनों की जरूरतों को पूरा कर सकता है.
जापान की स्थिति भी मजबूत है, जहाँ सरकारी और निजी क्षेत्रों को मिलाकर कुल 470 मिलियन बैरल तेल सुरक्षित है, जो अकेले सरकारी स्तर पर ही 146 दिनों की मांग को पूरा करने में सक्षम है.
यूरोपीय देशों में जर्मनी के पास 110 मिलियन बैरल कच्चा तेल और 67 मिलियन बैरल रिफाइंड उत्पाद हैं, जबकि फ्रांस के पास 120 मिलियन बैरल का भंडार है जिसमें पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल का मिश्रण शामिल है.
इटली भी अपने कानून के तहत 76 मिलियन बैरल का स्टॉक बनाए हुए है, जो उसके 90 दिनों के आयात के बराबर है.
ब्रिटेन ने अपनी रणनीति अलग रखते हुए सरकारी भंडारण के बजाय निजी उद्योगों को न्यूनतम स्टॉक रखने के लिए अनिवार्य किया है, जिसके तहत उसके पास करीब 68 मिलियन बैरल तेल और उत्पाद उपलब्ध हैं.
कनाडा इस दौड़ में शामिल नहीं है क्योंकि वह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा तेल उत्पादक और शुद्ध निर्यातक है, जो प्रतिदिन 50 लाख बैरल से अधिक तेल निकालता है.
भारत के संदर्भ में बात करें तो देश के पास वर्तमान में 25 करोड़ बैरल (लगभग 4,000 करोड़ लीटर) से अधिक का भंडार है, जो करीब 60 दिनों या 7-8 सप्ताह की राष्ट्रीय मांग को पूरा कर सकता है.
भारत का यह महत्वपूर्ण स्टॉक मैंगलोर, पादुर और विशाखापत्तनम जैसे शहरों में भूमिगत गुफाओं, टैंकों और पाइपलाइनों में सुरक्षित रखा गया है. ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से भारत ने अपने आयात स्रोतों में भी विविधता लाई है और अब वह 27 के बजाय 40 देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है.
हालांकि, भारत के कुल आयात का 40% अभी भी सामरिक रूप से संवेदनशील 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' के रास्ते आता है, जबकि शेष 60% आपूर्ति रूस, पश्चिम अफ्रीका और अमेरिका जैसे अन्य सुरक्षित मार्गों से सुनिश्चित की जा रही है.