Covid-19 की उत्पत्ति कैसे हुई?
नई दिल्ली । डेस्क: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कोविड-19 महामारी की उत्पत्ति को लेकर कई अनुत्तरित सवालों को रेखांकित किया है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह वायरस जंगली जानवरों, खासकर चमगादड़ों या किसी मध्यवर्ती प्रजाति के जरिये इंसानों तक पहुंचा हो सकता है, लेकिन प्रयोगशाला से रिसाव की संभावना को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया गया है.
डब्ल्यूएचओ के साइंटिफिक एडवाइजरी ग्रुप फॉर दी ऑरिजिंस ऑफ नोवल पेथागेन्स (सागो) ने तीन साल की गहन जांच के बाद यह रिपोर्ट जारी की है. इस समूह में 27 देशों के स्वतंत्र वैज्ञानिक शामिल हैं. सागो ने 52 बैठकें आयोजित कीं, कई शोध पत्रों का अध्ययन किया और वैज्ञानिकों, पत्रकारों व सरकारी अधिकारियों से बातचीत की. इसके बावजूद, महामारी की उत्पत्ति को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां अभी भी अधूरी हैं.
डब्ल्यूएचओ के प्रमुख डॉ. टेड्रोस घेब्रेयेसस ने कहा, "यह एक जटिल वैज्ञानिक जांच है. हम सभी संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं, लेकिन सटीक जवाब के लिये और अधिक डेटा की जरूरत है. हम चीन और अन्य देशों से आग्रह करते हैं कि वे उपलब्ध जानकारी साझा करें, ताकि भविष्य में ऐसी महामारियों से बचा जा सके."
रिपोर्ट में बताया गया है कि वायरस की उत्पत्ति की जांच के लिए चीन से शुरुआती मरीजों के स्वास्थ्य डेटा, वुहान की मंडियों में बिकने वाले जानवरों का ब्योरा और वहां की प्रयोगशालाओं की सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी मांगी गई थी. हालांकि, चीन ने अब तक यह जानकारी साझा नहीं की है, जिसके कारण जांच में बाधा आ रही है.
सागो की अध्यक्ष डॉ. मरीत्जी वेंटर ने जोर देकर कहा, "यह सिर्फ वैज्ञानिक खोज का मामला नहीं है, बल्कि यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी भी है. यह समझना जरूरी है कि यह वायरस कहां से आया और कैसे फैला, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके."
वर्ष 2020 में विश्व स्वास्थ्य महासभा ने कोविड-19 की उत्पत्ति की जांच का प्रस्ताव पारित किया था. इसके बाद 2021 में डब्ल्यूएचओ ने सागो का गठन किया, जिसे दो कार्य सौंपे गये. पहला नये रोगों की उत्पत्ति के लिये एक वैज्ञानिक ढांचा तैयार करना और दूसरा कोविड-19 की उत्पत्ति की जांच करना.
डब्ल्यूएचओ ने स्पष्ट किया है कि यह जांच अभी पूरी नहीं हुई है. भविष्य में नई जानकारी मिलने पर विशेषज्ञ उसका और विश्लेषण करेंगे. संगठन ने सभी देशों से सहयोग की अपील की है, ताकि ऐसी महामारियों की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाये जा सकें.