होर्मुज: पानी के भीतर बिछी बारूदी सुरंगें बनीं बड़ी चुनौती
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि रविवार को ईरान के साथ एक ऐतिहासिक समझौता होने जा रहा है, जिसके तुरंत बाद रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी जहाजों के लिए पूरी तरह से खोल दिया जाएगा. हालांकि, विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि कागजों पर समझौता होना जितना आसान है, पानी के भीतर हालात सामान्य करना उतना ही समय लेने वाला काम होगा, क्योंकि इस रास्ते में सबसे बड़ा कांटा ईरान द्वारा बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगें (माइन्स) हैं.
अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले नौपरिवहन को बाधित कर दिया था. इस बेहद संकरे और महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग से कोई भी जहाज न गुजर सके, इसके लिए ईरान ने पानी के भीतर जगह-जगह माइन्स और बम बिछा दिए थे.
अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, फिलहाल एक तय और सीमित रास्ते से ही कुछ जहाजों को निकाला जा रहा है, लेकिन पूरा होर्मुज क्षेत्र अभी भी मालवाहक जहाजों के लिए सुरक्षित नहीं है. अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि माइन्स को हटाने का काम बाद में किया जाएगा, फिलहाल प्राथमिकता ईरान के साथ समझौता कर जलमार्ग को चालू करने की है.
दूसरी तरफ, ट्रंप के इस बड़े दावे पर ईरान ने अभी तक पूरी तरह मुहर नहीं लगाई है. ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि रविवार को ही समझौता होना तय नहीं है, लेकिन अगले कुछ दिनों के भीतर इस पर सहमति बन सकती है.
इस बीच, ईरान में इस संभावित समझौते का विरोध भी शुरू हो गया है. अमेरिका के साथ हाथ मिलाने के विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए हैं और विदेश मंत्रालय के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं.
इस तनावपूर्ण स्थिति के बीच आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, इस शुरुआती समझौते के केंद्र में केवल होर्मुज जलमार्ग को ही रखा गया है, जबकि दोनों देशों की बाकी शर्तों पर बाद में बात होगी. शुरुआती डील के तहत ईरान होर्मुज से अपना सैन्य नियंत्रण हटाएगा, और इसके बदले में अमेरिका ईरान पर लगाई गई समुद्री नाकेबंदी को खत्म कर देगा.
हालांकि, इस समझौते के बाद भी सबसे बड़ी चुनौती पानी के भीतर छिपे बमों को सुरक्षित बाहर निकालना है. अधिकारियों का कहना है कि जमीन पर बिछाई गई बारूदी सुरंगों को खोजना और नष्ट करना आसान होता है, लेकिन पानी के भीतर इन्हें ढूंढना बेहद पेचीदा काम है.
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि ईरान ने इन माइन्स को पानी में छोड़ने के बाद ट्रैक नहीं किया, जिससे वे समुद्री लहरों और बहाव के साथ अलग-अलग दिशाओं में फैल चुकी हैं. यही वजह है कि अमेरिकी नौसेना और विशेषज्ञ दल इस क्षेत्र में बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं.