होरमुज संकट: ट्रंप के सैन्य विकल्प के बीच जयशंकर ने दिया बातचीत का सुझाव
नई दिल्ली । डेस्क: भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 'फाइनेंशियल टाइम्स' को दिए एक साक्षात्कार में कहा है कि ईरान के साथ सीधी कूटनीतिक बातचीत ही होरमुज जलडमरूमध्य के माध्यम से शिपिंग को फिर से शुरू करने का सबसे प्रभावी तरीका है.
यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमलों के जवाब में ईरानी सेना की सक्रियता को देखते हुए अन्य देशों से इस मार्ग की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की है.
ट्रंप ने विशेष रूप से चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देशों से इस महत्वपूर्ण मार्ग की रक्षा में मदद मांगी है, जहां से दुनिया के कुल तेल का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है.
डॉ. जयशंकर ने जानकारी दी कि भारत तेहरान के साथ लगातार बातचीत कर रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम भी मिले हैं.
उन्होंने उदाहरण दिया कि शनिवार को दो भारतीय एलपीजी टैंकर, 'शिवालिक' और 'नंदा देवी', सुरक्षित रूप से इस मार्ग को पार कर भारत की ओर बढ़े.
विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारतीय जहाजों के लिए कोई "ब्लैंकेट एग्रीमेंट" नहीं है और न ही इसके बदले ईरान को कुछ दिया गया है.
उन्होंने अन्य देशों को भी सलाह दी कि सैन्य दबाव के बजाय तर्क और समन्वय के माध्यम से समाधान निकालना बेहतर है.
जब उनसे पूछा गया कि क्या यूरोपीय देश भी भारत के इस मॉडल को अपना सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि ईरान के साथ हर देश के संबंध अलग होते हैं, लेकिन भारत अपनी कूटनीतिक पहुंच का अनुभव साझा करने के लिए तैयार है.