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दार्जीलिंग में भारी बारिश से भूस्खलन: 18 की मौत, कई लापता, पर्यटक फंसे

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05 अक्टू. 2025, 02:36 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

दार्जलिंग
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न्यू जलपाईगुड़ी। डेस्क: दार्जीलिंग की पहाड़ियों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने कहर बरपा दिया है. शनिवार को भारी वर्षा के कारण कई जगहों पर भूस्खलन हो गए, जिसमें कम से कम 18 लोगों की जान चली गई और कई अन्य लापता बताए जा रहे हैं. इससे घरों को बहा ले जाने, सड़कों को क्षतिग्रस्त करने और दूरदराज के गांवों को काट देने की स्थिति पैदा हो गई. 


अधिकारियों के अनुसार, बराकपुर नदी पर स्थित महत्वपूर्ण धुधिया लोहे का पुल भी पानी के तेज बहाव में ढह गया, जो सिलीगुड़ी और मिरीक को जोड़ता था.


मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्थिति को 'गंभीर' बताते हुए पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजा राशि की घोषणा की है, हालांकि राशि का खुलासा नहीं किया. उन्होंने कहा कि यह प्राकृतिक आपदा दुर्भाग्यपूर्ण है और भूटान से आने वाली अतिरिक्त बाढ़ ने उत्तर बंगाल को प्रभावित किया है. सुबह 6 बजे से ही स्थिति पर नजर रखते हुए पांच प्रभावित जिलों के अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक की. 


बनर्जी ने सोमवार दोपहर को मुख्य सचिव मनोज पंत के साथ सिलीगुड़ी पहुंचने का ऐलान किया, लेकिन पहले कोलकाता में दुर्गा पूजा कार्निवल के समापन के बाद ही रवाना होंगी. उन्होंने पर्यटकों से अपील की कि घबराएं नहीं, जहां हैं वहीं रहें. होटल वाले अधिक किराया न वसूलें, राज्य सरकार उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करेगी.


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दार्जीलिंग की त्रासदी पर दुख जताते हुए कहा कि केंद्र सरकार प्रभावितों को हर संभव सहायता देगी. एक्स पर पोस्ट में उन्होंने भारी बारिश और भूस्खलन की स्थिति पर नजर रखने का उल्लेख किया. 


उत्तर बंगाल विकास मंत्री उदयन गुहा ने मौतों की संख्या 17 बताई, जिसमें मिरीक में 11 और दार्जीलिंग में 6 शामिल हैं. एनडीआरएफ और जिला प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक, 10 मौतें पुष्ट हो चुकी हैं, जबकि दो व्यक्ति अभी भी लापता हैं. मौतें सारसाली, जसबीरगांव, मिरीक बस्ती, धर गांव (मेची) और मिरीक झील क्षेत्र में हुईं. धर गांव में भारी कीचड़ बहाव से कई घर ध्वस्त हो गए, जहां से चार लोगों को मलबे से बचाया गया.


बचाव कार्य में स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रतिक्रिया दल सक्रिय हैं. मिरीक झील क्षेत्र, जो सबसे अधिक प्रभावित है, वहां एनडीआरएफ की टीम पहुंच चुकी है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि लगातार बारिश से इलाका फिसलन भरा हो गया है, जिससे बचाव अभियान कठिन हो रहा है. मिट्टी काटने वाली मशीनें ढलानों पर काम नहीं कर पा रही.  


मिरीक-सुखियापोखरी सड़क सहित प्रमुख मार्गों पर यातायात बाधित है, जबकि पहाड़ी बस्तियों में संचार लाइनें कट गई हैं. हजारों पर्यटक भूस्खलन और सड़क अवरुद्ध होने से फंस गए हैं. गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन ने टाइगर हिल और रॉक गार्डन जैसे पर्यटन स्थलों को बंद करने का फैसला लिया. 


खिलौना ट्रेन की सेवाएं भी निलंबित कर दी गईं. बंगाल पुलिस ने फंसे पर्यटकों और निवासियों के लिए हेल्पलाइन नंबर 9147889078 जारी किया है.


ममता बनर्जी ने बताया कि मात्र 12 घंटों में 300 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई, जिससे सात स्थानों पर भूस्खलन और बाढ़ आ गई. यह स्थिति पिछले महीने कोलकाता की बाढ़ जैसी है. 


भारत मौसम विभाग ने उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, दार्जीलिंग और कालिमपोंग के लिए 6 अक्टूबर तक अत्यंत भारी वर्षा का रेड अलर्ट जारी किया है. संतृप्त मिट्टी के कारण और भूस्खलन व सड़क अवरोध की चेतावनी दी गई. 


अधिकारियों का प्राथमिक लक्ष्य मिरीक झील के पास लापता दो व्यक्तियों को खोजना और कटे हुए क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बहाल करना है. रात भर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में बचाव जारी है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP