BSc Nursing: न्यूनतम 10वें परसेंटाइल की अनिवार्यता खत्म- HC
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य के नर्सिंग कॉलेजों में दाखिले की उम्मीद लगाए बैठे छात्रों के हक में एक बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए बीएससी (Nursing) कोर्स में प्रवेश हेतु राज्य सरकार द्वारा तय किए गए न्यूनतम 10वें परसेंटाइल (10th Percentile) के मानदंड को पूरी तरह से रद्द कर दिया है.
इसके साथ ही, हाई कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) द्वारा दी गई ढील के तहत बिना किसी न्यूनतम योग्यता परसेंटाइल की शर्त के, खाली सीटों को भरने के लिए नए सिरे से काउंसलिंग का दौर आयोजित करें.
न्यायाधीश अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने साफ किया कि यह निर्देश इस मामले के असाधारण और विशिष्ट तथ्यों को ध्यान में रखते हुए दिया गया है. इसमें आईएनसी द्वारा दी गई एकमुश्त छूट भी शामिल है, जो राज्य में बड़ी संख्या में सीटों के खाली रहने और छत्तीसगढ़ की विशेष शैक्षणिक परिस्थितियों को देखते हुए दी गई थी.
कोर्ट का यह फैसला प्राइवेट नर्सिंग कॉलेज एसोसिएशन ऑफ छत्तीसगढ़ और कुछ इच्छुक छात्रों द्वारा दायर याचिकाओं पर आया है, जिन्होंने सरकार के इस फैसले को चुनौती दी थी.
मामले की पृष्ठभूमि में, आईएनसी ने शुरुआत में विभिन्न श्रेणियों के लिए न्यूनतम योग्यता मानदंड 40वें और 50वें परसेंटाइल के बीच तय किया था. लेकिन शुरुआती काउंसलिंग के बाद भी कुल 7,811 स्वीकृत सीटों में से 4,147 सीटें खाली रह गईं, क्योंकि कई छात्र जरूरी अंक हासिल नहीं कर पाए थे.
इसके बाद, राज्य चिकित्सा शिक्षा विभाग के अनुरोध पर, आदिवासी क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक स्थितियों का हवाला देते हुए, आईएनसी ने 29 दिसंबर 2025 को एकमुश्त ढील दी थी. हालांकि, राज्य सरकार ने बेंचमार्क को पूरी तरह हटाने के बजाय उसी दिन एक आदेश जारी कर सभी श्रेणियों के लिए 10वां परसेंटाइल अनिवार्य कर दिया था.
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि एक बार जब शीर्ष नियामक संस्था (INC) ने नियमों में ढील दे दी, तो राज्य सरकार को नया पात्रता मानक लागू करने का कोई अधिकार नहीं था. उन्होंने यह भी दलील दी कि इस 10वें परसेंटाइल की शर्त के कारण भी 2,000 से अधिक सीटें खाली रह गईं, जिससे बुनियादी ढांचा बर्बाद हो रहा था और योग्य छात्र दाखिले से वंचित थे.
दूसरी ओर, राज्य सरकार ने अपने फैसले का बचाव करते हुए इसे शैक्षणिक स्तर बनाए रखने के लिए एक प्रशासनिक उपाय बताया था.
अदालत ने राज्य सरकार के इस रुख को खारिज करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ नर्सिंग प्रवेश नियम, 2019 के नियम 4(4) के तहत राज्य को आईएनसी द्वारा तय मानकों का पालन करना अनिवार्य है. कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि विशेषज्ञ वैधानिक निकाय द्वारा निर्धारित मानकों को राज्य सरकार के अधीन काम करने वाला कोई प्रशासनिक प्राधिकरण बदल, कम या उसमें कुछ जोड़ नहीं सकता है.
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दाखिले में देरी मुकदमेबाजी के कारण हुई है, न कि छात्रों की गलती से. कोर्ट ने प्राधिकारियों को 15 दिनों के भीतर नई काउंसलिंग का शेड्यूल जारी करने और चयनित उम्मीदवारों को प्रवेश औपचारिकताएं पूरी करने के लिए 30 दिनों का समय देने का निर्देश दिया है.
इसके अलावा, कॉलेजों को अतिरिक्त कक्षाएं और व्यावहारिक सत्र आयोजित करने के लिए कहा गया है ताकि नए छात्र अपना पाठ्यक्रम और उपस्थिति पूरी कर सकें. अदालत ने स्पष्ट किया कि इस आदेश को भविष्य के किसी प्रवेश सत्र के लिए मिसाल के तौर पर नहीं देखा जाएगा.