HC: बिना बदनीयत साबित किए जन सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाना गैरकानूनी
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम, 2005 की धारा 20 के तहत जन सूचना अधिकारी (PIO) पर जुर्माना लगाने के लिए यह साबित करना अनिवार्य है कि जानकारी जानबूझकर और बदनीयत से रोकी गई थी.
न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने राज्य सूचना आयोग के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत एक जन सूचना अधिकारी पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था.
यह मामला ग्राम पंचायत पछेड़ा के वित्तीय वर्ष 2014-15 से 2020-21 तक के दस्तावेजों से जुड़े एक आरटीआई आवेदन से शुरू हुआ था. आवेदक द्वारा समय पर जानकारी न मिलने की शिकायत के बाद, छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग ने 7 नवंबर 2023 को दिए अपने आदेश में माना कि जानकारी बिना किसी उचित कारण के रोकी गई और जन सूचना अधिकारी पर ₹25,000 की शास्ति (पेनल्टी) आयरोपित कर दी.
इस फैसले को चुनौती देते हुए जन सूचना अधिकारी राधिका सिदार ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की.
याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि आयोग ने बदनीयत या जानबूझकर जानकारी छिपाने का कोई स्पष्ट निष्कर्ष दर्ज किए बिना ही यह जुर्माना लगाया है.
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने कहा कि जब तक आयोग अपनी स्पष्ट और तर्कसंगत टिप्पणियों में बद्नियत सिद्ध नहीं करता, तब तक धारा 20 के तहत जुर्माना या अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश कानूनन सही नहीं ठहराया जा सकता.
अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता की ओर से कोई दुर्भावना या जानबूझकर की गई लापरवाही का प्रमाण नहीं है, जिसके चलते राज्य सूचना आयोग के जुर्माने वाले आदेश को निरस्त कर याचिका को स्वीकार कर लिया गया.