HC: दूसरी शादी के बावजूद 8 साल के बेटे की कस्टडी पिता के पास रहेगी
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने एक अहम निर्णय सुनाते हुए 8 वर्षीय मासूम बच्चे की कस्टडी उसके पिता को सौंपने का फैसला बरकरार रखा है. मां द्वारा याचिका दायर कर दावा किया गया था कि पिता के पुनर्विवाह के बाद बच्चे को सौतेली मां के दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, अदालत ने बच्चे से सीधी बातचीत के बाद मां के इस दावे को खारिज कर दिया.
जस्टिस पार्थ प्रतीक साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि बाल कस्टडी से जुड़े मामलों में बच्चे का कल्याण और उसकी इच्छा सर्वोपरि होती है.
न्यायाधीशों ने जब बच्चे से व्यक्तिगत संवाद किया, तो उसने अपने पिता और उनकी दूसरी पत्नी द्वारा उचित देखभाल, प्यार और शिक्षा दिए जाने की बात कही. मासूम ने अपनी मां के साथ जाने से इनकार करते हुए पिता के साथ ही रहने की इच्छा जताई.
मामला दोनों पक्षों के पुनर्विवाह से जुड़ा हुआ है. हिंदू अल्पसंख्यक और अभिभावकता अधिनियम के तहत याचिका दाखिल कर मां ने तर्क दिया था कि पेशा से ड्राइवर पिता बच्चे को पर्याप्त समय नहीं दे पाता और उसकी वित्तीय स्थिति भी बेहतर नहीं है.
वहीं पिता के वकील ने अदालत को बताया कि मां कई साल पहले बच्चे को छोड़ चुकी थी और खुद भी पुनर्विवाह कर चुकी है.
अदालत ने पाया कि पिता ड्राइवर के रूप में कमाकर भी बच्चे की परवरिश और पढ़ाई में कोई कमी नहीं छोड़ रहा है. सभी पहलुओं और बच्चे की इच्छा को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय के आदेश को सही ठहराया और मां की कस्टडी याचिका खारिज कर दी, हालांकि मां को बच्चे से मिलने के अधिकार जारी रखे गए हैं.