ट्रेन में अवैध रूप से बर्थ बेचने वाले TTEs पर HC सख्त, अधिकतम सजा का निर्देश
कोलकाता । डेस्क: कलकत्ता उच्च न्यायालय ने देश भर के सभी रेलवे जोनों के महाप्रबंधकों को एक कड़ा निर्देश जारी किया है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि ट्रेनों में खाली बर्थों को अवैध रूप से बेचने वाले ट्रैवलिंग टिकट परीक्षकों (TTEs) पर सेवा नियमों के तहत उपलब्ध अधिकतम जुर्माना और दंड लगाया जाए. अदालत ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि टीटीई द्वारा चंद पैसों के लालच में खाली सीटों को बेचना 'बाजार में सब्जी बेचने' जैसा हो गया है, और यही लापरवाही यात्रियों के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों की मुख्य वजह बनती है.
यह सख्त फैसला न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा और न्यायमूर्ति बिश्वरूप चौधरी की खंडपीठ ने साल 2009 के एक ट्रेन डकैती मामले की सुनवाई के दौरान सुनाया. मामला तीस्ता तोरसा एक्सप्रेस का है, जहां न्यू जलपाईगुड़ी से सियालदह की यात्रा कर रहे दो यात्रियों ने अनरिजर्व्ड (सामान्य) टिकट होने के बावजूद एक टीटीई को कथित तौर पर रिश्वत देकर बर्थ हासिल की थी.
इसके बाद ट्रेन में सवार दो अपराधियों ने इन यात्रियों को नशीला पदार्थ खिलाकर लूट लिया. इस घटना में जहर के असर और पहले से मौजूद बीमारियों के कारण सुनील कुमार दास नामक यात्री की मौत हो गई थी, जबकि दूसरे यात्री अरुण चक्रवर्ती नौ दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद बच सके.
हाई कोर्ट ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि बिना किसी उचित रिजर्वेशन और पहचान पत्र के यात्रियों को बर्थ दे देने से अपराधियों को बढ़ावा मिलता है. कोर्ट के अनुसार, ऐसे अनधिकृत यात्रियों का कोई रिकॉर्ड (नाम, फोन नंबर आदि) न होने के कारण अपराध के बाद उन्हें ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है.
खंडपीठ ने दो टूक कहा, "रेलवे में होने वाले इस तरह के अपराधों की जड़ टीटीई के हाथों में ही है."
इसके साथ ही अदालत ने इस मामले में पुलिस जांच और रेलवे स्टाफ के रवैये की भी कड़ी आलोचना की. कोर्ट ने पाया कि जांच अधिकारी ने मृतक के विसरा की फॉरेंसिक (FSL) रिपोर्ट तक एकत्र नहीं की, जिससे यह भी स्पष्ट नहीं हो सका कि विसरा जांच के लिए भेजा भी गया था या नहीं. कोर्ट ने इसे जांच तंत्र की गंभीर और अक्षम्य लापरवाही बताया.
बता दें कि इस मामले के आरोपियों (आलोक घोष और गोपाल मिस्त्री) को 2017 में निचली अदालत ने हत्या (धारा 302) के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई थी. हालांकि, हाई कोर्ट ने पुलिस जांच में पाई गई गंभीर कमियों के कारण हत्या और चोरी के आरोपों को खारिज कर दिया और उन्हें केवल जहर देने की धारा 328 के तहत दोषी माना, जिसमें अधिकतम 7 साल की सजा का प्रावधान है.
चूंकि दोनों आरोपी पहले ही क्रमशः 10 और 16 साल की जेल काट चुके हैं, इसलिए कोर्ट ने उन्हें जमानत बांड पर रिहा करने का आदेश दिया. लेकिन इसके साथ ही रेलवे सुरक्षा को लेकर पूरे देश के रेल प्रशासन को सख्त चेतावनी जारी कर दी है.