HC: कोरोना काल में छूटी परीक्षा, फिर भी मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति
बिलासपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न हुई असाधारण परिस्थितियों और परीक्षाओं में हुई देरी के लिए किसी भी आवेदक को दंडित नहीं किया जा सकता है. हाई कोर्ट ने महामारी के कारण शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) रद्द होने को उम्मीदवार की विफलता मानने से साफ इनकार कर दिया और अनुकंपा नियुक्ति के दावे को खारिज करने वाले सरकारी आदेश को रद्द कर दिया है.
धमतरी जिले के एक 26 वर्षीय युवक द्वारा दायर रिट याचिका को स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकल पीठ ने पंचायत निदेशक के 6 दिसंबर 2022 के आदेश को दरकिनार कर दिया. इस सरकारी आदेश में युवक को इस आधार पर अयोग्य घोषित कर दिया गया था कि वह निर्धारित तीन साल की अवधि के भीतर आवश्यक शैक्षणिक योग्यता हासिल करने में विफल रहा था.
हाई कोर्ट ने अब अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे कानून के अनुसार प्राथमिकता के आधार पर 45 दिनों के भीतर उसके आवेदन पर फिर से विचार करें.
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, याचिकाकर्ता के पिता एक सहायक शिक्षक थे, जिनका सेवाकाल के दौरान 7 अप्रैल 2017 को निधन हो गया था. पिता के निधन के बाद युवक ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, जिसके बाद उसे अनिवार्य डीएलएड (DElEd)/बीएड (BEd) और टीईटी (TET) योग्यता हासिल करने के लिए तीन साल का समय दिया गया था. युवक ने समय रहते साल 2019 में अपना डीएलएड पूरा कर लिया और 22 मार्च 2020 को आयोजित होने वाली टीईटी परीक्षा के लिए आवेदन भी कर दिया था.
लेकिन ठीक उसी समय देश में कोविड-19 महामारी का प्रकोप फैल गया, जिसके कारण परीक्षा को रद्द करना पड़ा. यह परीक्षा लंबे इंतजार के बाद आखिरकार 9 जनवरी 2022 को आयोजित हो सकी, जिसे याचिकाकर्ता ने पहली बार में ही सफलतापूर्वक पास कर लिया.
हाईकोर्ट ने मामले के दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद पाया कि मार्च 2020 की टीईटी परीक्षा पूरी तरह से महामारी के कारण प्रशासन द्वारा रद्द की गई थी. इसके साथ ही सरकारी पक्ष ऐसा कोई भी सबूत पेश करने में नाकाम रहा जिससे यह साबित हो सके कि मार्च 2020 से पहले कोई अन्य टीईटी परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें याचिकाकर्ता शामिल हो सकता था.
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि परीक्षा रद्द होने के बाद याचिकाकर्ता लगातार समय बढ़ाने की मांग कर रहा था और जैसे ही जनवरी 2022 में परीक्षा हुई, उसने इसे पास कर लिया.
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इन परिस्थितियों में यह बिल्कुल नहीं कहा जा सकता कि याचिकाकर्ता निर्धारित अवधि में योग्यता हासिल करने में विफल रहा. यह देरी पूरी तरह से महामारी से पैदा हुए हालातों के कारण हुई थी, न कि आवेदक की किसी लापरवाही या गलती की वजह से.
अपने इस ऐतिहासिक फैसले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के उस मार्गदर्शक आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने कोरोना महामारी के चलते 15 मार्च 2020 से 28 फरवरी 2022 तक की अवधि को किसी भी कानूनी समय-सीमा (Limitation) की गणना से बाहर रखने का निर्देश दिया था.
हाई कोर्ट ने कहा कि न्याय का यही सिद्धांत राज्य सरकार के विभागों और प्राधिकरणों पर भी समान रूप से लागू होता है.
अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि महामारी के व्यवधान को ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ता ने कानूनी रूप से स्वीकार्य अवधि के भीतर ही अपनी सभी योग्यताएं पूरी की हैं. इसलिए वह अनुकंपा नियुक्ति पाने का हकदार है. कोर्ट ने प्रतिवादी अधिकारियों को उसके दावे पर तेजी से कार्रवाई करने का आदेश दिया है.